स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा विश्वविद्यालय में छात्रों से जुड़ी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर कार्यकारिणी परिषद (ईसी) के उम्मीदवारों को ज्ञापन सौंपा गया।
छात्र मांगों पर विस्तार से बात रखते हुए एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर सचिव कामरेड मुकेश ने कहा कि वर्ष 2013 के बाद से प्रदेश में छात्र संघ चुनाव बंद हैं, जिससे छात्र राजनीति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। छात्र संघ के अभाव में छात्रों को अपना प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है और वे अपनी समस्याएं प्रभावी रूप से प्रशासन के समक्ष नहीं रख पा रहे हैं। एसएफआई ने स्पष्ट रूप से मांग की कि प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनावों को शीघ्र बहाल किया जाए, ताकि छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकें।
एसएफआई ने बताया कि संविधान के 93वें संशोधन (2005) के तहत पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में आज तक इसे लागू नहीं किया गया, जो संविधान का खुला उल्लंघन है। संगठन ने मांग की कि विश्वविद्यालय में ओबीसी आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।
छात्रावास समस्या पर बोलते हुए एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय में लगभग 4000 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि केवल 1200 विद्यार्थियों को ही हॉस्टल सुविधा मिल पा रही है। प्रदेश के प्रमुख सरकारी विश्वविद्यालय में यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। संगठन ने नए छात्रावासों के निर्माण की मांग की।
एसएफआई ने आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में करीब 70 प्रतिशत शिक्षकों की भर्ती फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की गई है, जो शैक्षणिक वातावरण को नुकसान पहुंचा रही है। साथ ही, ऐसे शिक्षक खुले तौर पर राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेकर विश्वविद्यालय ऑर्डिनेंस का उल्लंघन कर रहे हैं। एसएफआई ने इस मामले की न्यायिक जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।

नई शिक्षा नीति 2020 पर संगठन ने कहा कि इसके माध्यम से शिक्षा का निजीकरण और भगवाकरण किया जा रहा है। प्रगतिशील लेखकों की किताबों को पाठ्यक्रम से हटाया जा रहा है, जिसे एसएफआई ने जनविरोधी कदम बताया। एसएफआई ने गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2019 और 2021 में निकाले गए विज्ञापनों के बावजूद भर्ती नहीं की गई। आरटीआई से यह भी सामने आया है कि इस देरी के चलते विश्वविद्यालय द्वारा लगभग 4.50 करोड़ रुपये छात्रों से वसूले गए, जो गंभीर मामला है। संगठन ने तत्काल भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।
अंत में कामरेड मुकेश ने चेतावनी दी कि यदि इन सभी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो एसएफआई छात्रों को लामबंद कर बड़ा आंदोलन शुरू करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।