SFI ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय परिसर में कुछ तत्वों द्वारा उनकी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील विचारधारा से जुड़ी वॉल पेंटिंग को काले रंग से खराब किया गया। SFI ने इसे केवल दीवार पर हमला नहीं, बल्कि विचार, बहस और छात्र आवाज़ पर हमला बताया। संगठन ने कहा कि यह कृत्य विश्वविद्यालय परिसर के लिए “चिंताजनक और निंदनीय” है।
“विचारों को दबाने की कोशिश”—SFI का आरोप
SFI का कहना है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 1978 से लोकतांत्रिक, संवाद-आधारित और प्रगतिशील छात्र राजनीति की परंपरा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कैंपस में बहस और वैचारिक स्वतंत्रता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जिससे छात्र समुदाय में अनावश्यक तनाव और असहिष्णुता का माहौल बन रहा है। SFI ने कहा कि यह घटना बताती है कि कुछ संगठन वैचारिक संघर्ष को तर्क और बहस से नहीं, बल्कि दमन और बदनामी के रास्ते से लड़ना चाहते हैं।
“दीवार पर हमला नहीं, लोकतंत्र पर हमला”—SFI
संगठन ने कहा कि कैंपस की दीवारें छात्र राजनीति, विचार और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का प्रतीक होती हैं। दीवारों को काला करने की घटना विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक विरासत और परिसर के अकादमिक माहौल पर सीधा हमला है। SFI ने आरोप लगाया कि कुछ संगठनों की गतिविधियाँ विश्वविद्यालय को संवाद की जगह संघर्ष का मैदान बनाने की दिशा में बढ़ रही हैं, जो बेहद खतरनाक है।
प्रशासन से मांग—दोषियों पर कार्रवाई की जाए
SFI ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस घटना की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिसर के लोकतांत्रिक और सुरक्षित वातावरण को बनाए रखना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है।
“विचारों की लड़ाई दमन से नहीं, संवाद से जीती जाती है”—SFI
SFI ने कहा कि विचारों की लड़ाई दीवारों को खराब करने से नहीं जीती जाती। इसका समाधान केवल तर्क, विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक संवाद ही है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे हर प्रयास का विरोध करता रहेगा, जो विश्वविद्यालय के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करे।