SFI ने विभिन्न समस्याओं को लेकर राज्यपाल से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन

शिमला || 06 मार्च 2025 || Sfi विश्विद्यालय इकाई ने राज्यपाल को विश्वविद्यालये मे आ रही छात्रों को परेशानियां को लेकर ज्ञापन सौंपा। मुख्य मांगों में नई शिक्षा नीति (NEP-2020) को लागू करने की प्रक्रिया रोकी जाए – न केवल इस विश्वविद्यालय, बल्कि पूरे राज्य ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) को जल्दबाज़ी में लागू करने का भयानक अनुभव किया है, जिससे छात्रों के करियर और उनकी क्षमताओं को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। अब NEP-2020 को लागू करना एक और आपदा होगी, क्योंकि विश्वविद्यालय ने पहले ही बिना किसी तैयारी के, महज़ कट-पेस्ट करके CBCS प्रणाली लागू कर दी है। NEP-2020 शिक्षा के सांप्रदायिकरण, व्यापारीकरण और निजीकरण को बढ़ावा देने वाली नीति है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। अन्य मांग में छात्रसंघ चुनाव (SCA Election) बहाल करने की मांग की है।छात्रसंघ चुनाव छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है, जो प्रशासन और छात्रों के बीच एक सेतु का कार्य करता है और युवाओं में राजनीतिक चेतना विकसित करता है। सीधे निर्वाचित छात्रसंघ न केवल छात्रों की समस्याओं को उठाता है, बल्कि कॉलेज/विश्वविद्यालय प्रशासन की भ्रष्टाचारपूर्ण गतिविधियों पर भी नज़र रखता है। विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्यों द्वारा छात्रसंघ चुनाव न कराने का निर्णय अलोकतांत्रिक है। अतः इसे छात्रों के हित में तुरंत बहाल किया जाए।

अन्य मांग में सभी नियमित छात्रों को हॉस्टल की सुविधा दी जाए – विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं, जिन्हें हॉस्टल की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके अलावा ERP प्रणाली में अनियमितताओं को दूर किया जाए – ERP प्रणाली भ्रष्टाचार का अड्डा साबित हुई है, जिससे इसमें कई अनियमितताएँ पाई गई हैं और सबसे अधिक नुकसान छात्रों को हुआ है, क्योंकि इस प्रणाली के कारण उन्हें समय पर सेवाएँ नहीं मिल रही हैं। SFI माँग करता है कि इन अनियमितताओं को तुरंत दूर किया जाए और इसमें शामिल भ्रष्ट अधिकारियों की जाँच कर उन्हें दंडित किया जाए।

शैक्षणिक गतिविधियों के बजाय राजनीति में संलिप्त शिक्षकों पर कार्रवाई की जाए – विश्वविद्यालय में कई ऐसे शिक्षक हैं, जो शैक्षणिक गतिविधियों के बजाय राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्त हैं, यहाँ तक कि कुछ शिक्षक औपचारिक रूप से राजनीतिक संगठनों में पदाधिकारी भी हैं। इससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण दूषित हो रहा है, इसलिए इनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

शिक्षकों की भर्ती में न्यायिक जाँच करवाई जाए – SFI लगातार शिक्षकों की भर्ती की जाँच की माँग कर रहा है। RTI अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त जानकारी से पता चला है कि 70% से अधिक शिक्षक अयोग्य हैं, फर्जी प्रकाशनों के आधार पर नौकरी पा चुके हैं, UGC नियम 2009/2016 के अनुसार पीएचडी नहीं की है, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए हैं आदि। इस मुद्दे को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2023 में भी उठाया गया था, लेकिन SFI को संदेह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सही रिकॉर्ड सदन के समक्ष प्रस्तुत किया या नहीं। इसलिए हम न्यायिक जाँच की माँग करते हैं और SFI को भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

अन्य मांग में ग़ैर-शिक्षण (Non-Teaching) कर्मचारियों की परीक्षा आयोजित की जाए – 2018 में विश्वविद्यालय ने ग़ैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन अब तक इस परीक्षा का आयोजन नहीं हुआ है। इसलिए यह परीक्षा जल्द से जल्द आयोजित की जाए। वहीं ग़ैर-शिक्षण कर्मचारियों की आउटसोर्स भर्ती की जाँच की जाए – विश्वविद्यालय में 300 से अधिक ग़ैर-शिक्षण कर्मचारी किसी निजी एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्स आधार पर रखे गए हैं, जिनमें से अधिकांश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के रिश्तेदार हैं। उन्होंने आंतरिक षड्यंत्र के तहत फाइलें बनाकर, आउटसोर्स एजेंसी से संपर्क कर, और फिर धीरे-धीरे उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ कर्मचारी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले नियमित छात्र भी हैं। यह पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार से भरी हुई है, जहाँ योग्य और शिक्षित युवाओं के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। अतः इसकी जाँच करवाई जाए।

अन्य मांग में SC/ST छात्रवृत्ति बहाल की जाए – अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति में लगातार कटौती हो रही है। इसे रोका जाए और सभी छात्रवृत्तियाँ जल्द से जल्द बहाल की जाएँ। इसके अलावा नए हॉस्टल का निर्माण शीघ्र किया जाए – वर्तमान में विश्वविद्यालय में 10 गर्ल्स हॉस्टल और केवल 4 बॉयज़ हॉस्टल हैं, जबकि लगभग 7100 छात्र यहाँ अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन केवल 1500-2000 छात्रों को ही हॉस्टल मिल पाते हैं। बाकी छात्रों को महंगे किराए पर कमरों या पीजी में रहना पड़ता है, जहाँ बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होतीं। इसलिए जल्द से जल्द नए हॉस्टल का निर्माण किया जाए।

SFI यह भी दोहराता है कि छात्रसंघ चुनाव बहाल किया जाना अनिवार्य है, क्योंकि निर्वाचित छात्रसंघ प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। SFI ने अतीत में भी कई घोटालों का पर्दाफाश किया है।

इसलिए, हम आपसे निवेदन करते हैं कि उपरोक्त महत्वपूर्ण माँगों और ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करने के लिए समय निकालें और उच्च शिक्षा को बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाएँ, क्योंकि छात्र ही हमारे मानव संसाधन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का सही उपयोग करना आवश्यक है।

इकाई अध्यक्ष,अंकुश राणा,इकाई सेह सचिव,नावेद

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