Sfi द्वारा जनजातीय छात्रा पर हमले एवं छेड़ छाड़ के विरोध में हुआ धरना प्रदर्शन – abvp

rakesh nandan

21/06/2025

शिमला || 20 जून 2025 || आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में जनजातीय छात्र के साथ हुई निंदनीय घटना का विरोध करते हुए उपयुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया। जनजातिय समुदाय से संबंध रखने वाली किनौर जिले के ठंगी क्षेत्र से संबंध रखने वाली विद्यार्थी परिषद की कार्यकर्ता पर पुस्तकालय से छात्रावास जाते समय समर हिल चौंक में एसएफआई की 5 लड़कियो और 9 लड़को द्वारा तेजधार हथियार से हमला किया गया जिसमे जनजातीय छात्रा को गंभीर चोट लगी और जनजातीय समुदाय का अपमान करते हुए अभद्र टिपनी की गई । पुलिस और वि वि प्रशासन विश्वविद्यालय में बिगड़े हुए शांति एवं पढ़ाई का माहौल को ठीक करने में बिल्कुल विफल है। विद्यार्थी परिषद द्वारा बार बार प्रशासन से शरारती तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की जा रही है लेकिन प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लगातार हिंसा हो रही है जिसके पीछे बार बार केवल वामपंथी संगठन SFI का नाम सामने आ रहा है। हिंसा का माहौल बनाने का काम निरंतर यह संगठन करता आ रहा है।

 

अभी तक पुलिस द्वारा भी दोषियों में कोई सख्त कार्यवाही नहीं की गई है जिससे SFI के गुंडों के हौंसले और बुलंद हो रहे हैं।वामपंथी SFI के गुंडे आज भी खुले आम घूम रहे है और जनजातीय छात्रा जिसका हाथ तोड़ा गया है उसके लिए किसी भी तरह का न्याय दिलाने का काम करता पुलिस प्रशासन नहीं नजर आ रहा है। इसी घटना के संदर्भ में अभाविप जिला संयोजक दिविज ठाकुर ने उपयुक्त कार्यालय में भाषण देते हुए बताया की पीछले तीन महीने से विश्वविद्यालय का माहौल खराब करने का कम एसएफआई के गुंडों द्वारा किया जा रहा है विश्वविद्यालय में एक बार फिर निंदनीय घटना सामने आयी 17-06-2025 की शाम 4 बजे के करीब विद्यार्थी परिषद के 8 कार्यकर्ताओं पर एसएफआई 9 ,10 गुंडों ने जानलेवा हमला किया।

 

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में वामपंथी छात्र संगठन (SFI) के गुंडों द्वारा जनजातीय छात्रा पर किए गए अमानवीय हमले के विरोध में आज उपायुक्त कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया। शिमला पुलिस की नाकामी ने कारण अभी इन गुंडा तत्वों पर कोई कार्यवाई नही हुई है। शिमला जिला के सहायक पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की गई। जहाँ एक ओर एसएफआई सार्वजनिक मंचों पर महिला अधिकारों और सामानता की बात करता है,वही दूसरी ओर इसके सदस्यों द्वारा लड़कियों को डराने-धमकाने,मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने से भी नहीं चूकते ।यह एक घिनौना दोहरा मापदंड है,जिसे विद्यार्थी परिषद बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेगे ।

 

उन्होंने बताया की किसी भी संगठन को,चाहे वह छात्रहित के नाम पर ही क्यों न हो,लड़कियों की गरिमा और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं है ।ऐसे वक्तव्यों से न केवल विश्वविद्यालय का माहौल दूषित होता है,बल्कि यह छात्राओं की मानसिक सुरक्षा को भी प्रभावित करता है जनजातीय छात्रा के साथ हुई निंदनीय घटना यह कोई पहली बार नहीं है इस प्रकार की घटना एक वर्ष पहले के करीब भी विश्वविद्यालय छात्रावास में सामने आयी थी जिसमे एसएफआई के द्वारा जनजातीय समुदाय के छात्र से मारपीट की गई थी जिसमे छात्र की आंख में गंभीर चोट लगी थी।

 

अगर हम विश्व विद्यालय परिसर के बाहर की बात करे तो इसी वर्ष जनवरी माह में छत्तीसगढ़ी के बीजापुर में सेना पर हमला करने वाले भी कम्युनिस्ट थे कुछ वर्ष पूर्व जेएनयू में भारत के टुकड़े करने के नारे को लगाने वाले भी कम्युनिस्ट थे साथ ही जब पहलगाम में हमला हुआ तो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ चुपी साधने वाले भी कम्युनिस्ट थे जिससे कि यह साबित होता है कि यह संगठन राष्ट्र विरोधी संगठनों की सूची में है। विद्यार्थी परिषद सरकार व पुलिस प्रशासन से माँग करता है कि एसएफआई सदस्यों द्वारा की गई मारपीट और अभद्र टिप्पणियों की तत्काल निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी पाए गए एसएफआई के सदस्यों के खिलाफ प्रदेश के मुखिया से भी विद्यार्थी परिषद यह मांग करती है की दोषियो के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए।

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