जनसमस्याओं पर फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

rakesh nandan

04/04/2026

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कफोटा-কমरऊ क्षेत्र में जनसमस्याओं को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। क्षेत्र के युवाओं और समाजसेवियों ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए लंबित समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम कफोटा की अनुपस्थिति में तहसीलदार कमरऊ को ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

स्थानीय लोगों ने सतौन–रेणुका जी सड़क की खराब हालत को लेकर प्रशासन को घेरा। उनका कहना है कि यह सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा है, लेकिन वर्षों से इसकी स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। लोगों ने मांग की कि इस सड़क को जल्द चौड़ा और पक्का किया जाए, ताकि आवागमन सुचारू हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

इसके अलावा, सतौन में बंद पड़ी उप-तहसील का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि उप-तहसील का बंद होना क्षेत्र की जनता के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने प्रशासन से इसे तुरंत बहाल करने की मांग की, ताकि लोगों को दूर-दराज के इलाकों में भटकना न पड़े।

सतौन पुल की जर्जर स्थिति को लेकर भी लोगों ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इसे “हादसे का इंतजार” बताते हुए कहा कि पुल की हालत बेहद खराब है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई, तो किसी भी अनहोनी के लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।

इस विरोध प्रदर्शन में कई स्थानीय युवा और समाजसेवी शामिल हुए। इनमें एडवोकेट दिनेश चौहान, मनोज पुंडीर, विक्रम चौहान, हरिचंद शर्मा, यशपाल ठाकुर, विजेंद्र तोमर और अभी ठाकुर सहित क्षेत्र के अन्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने साफ शब्दों में कहा कि वर्षों से इन मुद्दों को उठाया जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनसमस्याओं पर प्रशासन की चुप्पी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अंत में उन्होंने प्रशासन को 7 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो सतौन और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को एकजुट कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। साथ ही जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही लोगों में असंतोष पैदा कर रही है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह विरोध आने वाले समय में और उग्र रूप ले सकता है।