1% मार्केट फीस से किसान-बागवान प्रभावित: भाजपा

rakesh nandan

21/02/2026

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता Sandeepani Bhardwaj ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा फल एवं सब्जी कारोबार पर 1% मार्केट फीस पुनः लागू करने के निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम किसानों, बागवानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा और इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।

शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश पहले ही आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे में इस प्रकार का निर्णय स्थिति को और जटिल बना सकता है।


एपीएमसी के माध्यम से शुल्क वसूली

भाजपा प्रवक्ता के अनुसार सरकार ने 2014 की अधिसूचना को रद्द करते हुए एपीएमसी (कृषि उपज मंडी समिति) के माध्यम से 1% शुल्क वसूली की व्यवस्था फिर से लागू की है।

उन्होंने दावा किया कि इससे सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 40-50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।

हालांकि उन्होंने कहा कि यह आय अंततः किसानों और उपभोक्ताओं की जेब से ही आएगी।


किसानों और बागवानों पर प्रभाव का दावा

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि इस निर्णय से मंडियों में कार्यरत आढ़तियों, निजी मार्केट यार्ड संचालकों और दूसरे राज्यों से आने वाले व्यापारियों पर असर पड़ेगा।

उन्होंने आशंका जताई कि अतिरिक्त शुल्क का भार फसल की खरीद कीमतों पर पड़ेगा, जिससे किसानों को मिलने वाली वास्तविक आय प्रभावित हो सकती है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि व्यापार लागत बढ़ेगी तो उसका प्रभाव उपभोक्ता मूल्य पर भी दिखाई दे सकता है।


एफटीए को लेकर बयान

भाजपा प्रवक्ता ने केंद्र सरकार की मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार इन समझौतों पर भ्रामक बयानबाजी कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य स्तर पर लिए जा रहे निर्णयों की जिम्मेदारी से बचने के लिए केंद्र की नीतियों को निशाना बनाया जा रहा है।


दोहरी नीति का आरोप

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि राज्य सरकार एक ओर किसानों के हितों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शुल्क बढ़ाकर उन पर आर्थिक दबाव डाल रही है।

उन्होंने इसे दोहरी नीति करार देते हुए कहा कि भाजपा किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेगी।


राजनीतिक बयानबाजी के बीच मुद्दा चर्चा में

1% मार्केट फीस का मुद्दा प्रदेश में राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

जहां विपक्ष इसे किसान विरोधी कदम बता रहा है, वहीं सरकार का पक्ष है कि राजस्व सुदृढ़ करने और मंडी ढांचे को मजबूत करने के लिए यह निर्णय आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे निर्णयों के प्रभाव का वास्तविक आकलन समय के साथ ही स्पष्ट हो सकेगा।


निष्कर्ष

1% मार्केट फीस को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

भाजपा ने इसे किसानों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बताया है, जबकि सरकार इसे राजस्व और ढांचागत सुधार से जोड़कर देख रही है।

आने वाले समय में इस निर्णय का प्रभाव मंडी व्यवस्था, किसानों की आय और बाजार मूल्यों पर किस प्रकार पड़ता है, यह देखने योग्य होगा।