अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, सप्लाई में कमी और मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
मीडिया से बातचीत करते हुए हिमाचल प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स पांवटा साहिब के अध्यक्ष सतीश गोयल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दाम एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में आई कमी के कारण यह समस्या वैश्विक स्तर पर उत्पन्न हुई है।
सतीश गोयल ने कहा कि मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने अस्थिर माहौल के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार और आम लोगों के नियंत्रण से बाहर यह स्थिति आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रभाव डाल रही है।
उन्होंने बताया कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से सबसे अधिक असर औद्योगिक क्षेत्र और परिवहन व्यवस्था पर पड़ेगा। माल ढुलाई महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका प्रभाव बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को भी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ेगा।
चेंबर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों के बावजूद केंद्र सरकार ने भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि कई पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में अभी भी ईंधन की कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रण में हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अस्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के बावजूद भारत में कीमतों में बड़ी स्थिरता देखने को मिली है। केंद्र सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ कम करने का प्रयास कर रही है।
सतीश गोयल ने प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल का संयमित उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग और अनावश्यक ईंधन खपत कम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है और सप्लाई सामान्य होती है तो भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल उद्योग जगत और व्यापारिक क्षेत्र वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं।