रेणुका डैम पर विस्थापितों का विरोध, कार्य रोका
रेणुका जी क्षेत्र में चल रही रेणुका बांध परियोजना को लेकर विस्थापित परिवारों का विरोध तेज हो गया है। रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति ने बैठक आयोजित कर अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाई। बैठक के बाद समिति के सदस्यों ने रेणुका डैम में चल रहे कार्य को अस्थायी रूप से रोक दिया और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान विस्थापित परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
150 परिवारों की सूची सार्वजनिक करने की मांग
संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने डैम के नए एजीएम अरुण कपूर से मुलाकात कर अपनी मांगों पर चर्चा की। समिति का कहना है कि 150 प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। बैठक में अधिकारियों की ओर से आश्वासन दिया गया कि 20 दिनों के भीतर 150 परिवारों की सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि 20 दिनों के भीतर सूची जारी नहीं होती, तो वे पुनः डैम का कार्य बंद करने को मजबूर होंगे।
छह परिवारों के विस्थापन का मुद्दा
समिति ने बताया कि वर्तमान में छह परिवारों को 30 दिन के भीतर अपने घर खाली करने का नोटिस दिया गया है। संघर्ष समिति का कहना है कि इन परिवारों का उचित और सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। समिति ने इन छह परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, वे अपने घर नहीं छोड़ेंगे और संघर्ष जारी रहेगा।
नेतृत्व और भागीदारी
बैठक में समिति के अध्यक्ष विजय कुमार ठाकुर, संयोजक विनोद कुमार ठाकुर, प्रेस सचिव जोगी ठाकुर, महासचिव शुभम अत्री सहित सतपाल तोमर, पूरन सिंह, राकेश, हरनाम, कमल और भानु शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि विस्थापित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
पारदर्शिता और पुनर्वास पर जोर
संघर्ष समिति का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, वैकल्पिक आवास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि विकास परियोजनाएं आवश्यक हैं, लेकिन उनके कारण प्रभावित होने वाले परिवारों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
प्रशासन और समिति के बीच संवाद
एजीएम के साथ हुई चर्चा को समिति ने सकारात्मक कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। 20 दिन की समयसीमा पूरी होने के बाद यदि सूची सार्वजनिक नहीं होती, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में शांति बनाए रखी गई, लेकिन समिति ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर वे फिर से कार्य रुकवाने का कदम उठा सकते हैं।