हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों ने भूमि आवंटन को लेकर नाराजगी जाहिर की है। मंगलवार को डंडा अंबोया में जमीन के डिमार्केशन के दौरान विस्थापितों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रस्तावित जमीन को पूरी तरह से नकार दिया।
📍 डिमार्केशन के दौरान ही जताया विरोध
रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले पहुंचे प्रभावित परिवारों ने मौके पर ही जमीन की स्थिति को लेकर असंतोष व्यक्त किया। समिति के प्रेस सचिव योगी ठाकुर ने बताया कि जिस प्रकार की जमीन उन्हें कागजों में दिखाई गई थी, वास्तविकता में वह उससे बिल्कुल अलग निकली। उन्होंने कहा कि डिमार्केशन के दौरान ही विस्थापितों ने प्रक्रिया को बीच में छोड़ दिया और विरोध स्वरूप वापस लौट गए।
🌾 जमीन की गुणवत्ता पर सवाल
विस्थापितों का आरोप है कि दस्तावेजों में उन्हें उपजाऊ (क्लाऊ/कहलाऊ) जमीन बताई गई थी, लेकिन मौके पर स्थिति इसके विपरीत मिली।
जमीन बंजर जैसी दिखाई दी
पानी की कोई व्यवस्था नहीं
सिंचाई के लिए एक बूंद पानी तक उपलब्ध नहीं
इस कारण प्रभावित परिवारों ने इसे खेती योग्य नहीं माना।
🚧 सड़क और मूलभूत सुविधाओं का अभाव
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने यह भी बताया कि जिस स्थान पर जमीन दिखाई गई है वहां:
सड़क की कोई सुविधा नहीं
पहुंच मार्ग स्पष्ट नहीं
मूलभूत सुविधाओं का अभाव
इन समस्याओं के कारण वहां बसना या खेती करना मुश्किल बताया गया।
⚠️ स्थानीय लोगों की जमीन का भी विवाद
डिमार्केशन के दौरान एक और बड़ा मुद्दा सामने आया। विस्थापितों के अनुसार:
प्रस्तावित जमीन के बीच में स्थानीय लोगों की निजी भूमि भी मौजूद है
स्थानीय लोगों ने भी मौके पर आपत्ति जताई
इससे भूमि आवंटन को लेकर विवाद और बढ़ गया।
❌ 248 बीघा जमीन को किया अस्वीकार
विस्थापितों ने सामूहिक रूप से करीब 248 बीघा जमीन को पूरी तरह से नकार दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक उन्हें उचित, उपजाऊ और सुविधायुक्त जमीन नहीं दी जाती, वे किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
🗣️ समिति के सदस्य रहे मौजूद
इस दौरान रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के कई सदस्य मौके पर मौजूद रहे, जिनमें:
फाउंडर मेंबर विनोद ठाकुर
प्रेस सचिव योगी ठाकुर
मुख्य सलाहकार विपिन ठाकुर
निरंजन, सतपाल तोमर, हरिचंद, सोमदत्त शर्मा
अमित प्रताप सिंह तोमर, योगेंद्र, कपिल, बालमोहन, सुरेंद्र, मदन
सहित लगभग दो दर्जन विस्थापित परिवार शामिल रहे।
📌 प्रशासन से पुनर्विचार की मांग
विस्थापितों ने प्रशासन और संबंधित एजेंसी से मांग की है कि:
जमीन का पुनः सर्वेक्षण किया जाए
वास्तविक और उपयुक्त भूमि उपलब्ध करवाई जाए
मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
🔎 बढ़ सकता है विवाद
रेणुका बांध परियोजना पहले से ही विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दों को लेकर चर्चा में रही है। ऐसे में भूमि आवंटन को लेकर उठे नए विवाद से परियोजना की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।