रेणुका बांध विस्थापितों ने रोजगार और पुल की मांग उठाई

rakesh nandan

04/06/2026

रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों की विभिन्न मांगों को लेकर रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय ठाकुर के नेतृत्व में संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। समिति के अनुसार बैठक में 100 से अधिक लोग उपस्थित रहे और परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने परियोजना से संबंधित मांगों को लेकर एचपीपीसीएल के महाप्रबंधक अनूप शर्मा के साथ वार्ता की। समिति ने कहा कि बांध परियोजना के कारण जिन परिवारों की भूमि और मकान प्रभावित हुए हैं, उनके पुनर्वास और रोजगार संबंधी मुद्दों का समयबद्ध समाधान किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग

संघर्ष समिति ने प्रमुख मांग के रूप में परियोजना क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनियों में स्थानीय लोगों को रोजगार देने का मुद्दा उठाया। समिति का कहना है कि जिन लोगों की भूमि और मकान परियोजना के लिए अधिग्रहित किए गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

समिति ने मांग की कि परियोजना क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों में कम से कम 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को दिया जाए। समिति के अनुसार इस दायरे में लगभग 20 पंचायतों के प्रभावित परिवार आते हैं, जिन्हें रोजगार के अवसरों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

हाउसलेस और लैंडलेस परिवारों के मुद्दे उठाए

बैठक में हाउसलेस और लैंडलेस श्रेणी के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास संबंधी मामलों पर भी चर्चा हुई। संघर्ष समिति ने कहा कि प्रभावित लोगों को मिलने वाली सहायता और पुनर्वास पैकेज की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।

समिति ने विशेष रूप से यह मांग रखी कि हाउसलेस श्रेणी के लोगों से किसी प्रकार की अतिरिक्त अंडरटेकिंग (शपथ-पत्र) लेने की शर्त नहीं रखी जानी चाहिए। समिति का कहना है कि पात्र परिवार बिना किसी अतिरिक्त अंडरटेकिंग के अपने हक की राशि प्राप्त करना चाहते हैं।

मौथु क्षेत्र में पुल निर्माण की मांग

बैठक में भविष्य की यातायात सुविधाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। संघर्ष समिति का कहना है कि बांध निर्माण के बाद क्षेत्र की सड़क व्यवस्था में बदलाव होगा और गिरीपार क्षेत्र के लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने मौथु क्षेत्र के आसपास एक पुल निर्माण की मांग रखी। समिति का कहना है कि पुल बनने से गिरीपार क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिलेगी और लगभग 15 से 20 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी कम हो सकेगी।

समिति के अनुसार यह पुल न केवल स्थानीय निवासियों की आवाजाही को आसान बनाएगा बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मांगें पूरी होने तक कार्य रोकने की चेतावनी

बैठक में उपस्थित लोगों ने परियोजना प्रबंधन के समक्ष अपनी मांगों को मजबूती से रखा। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक विस्थापितों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक परियोजना से संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाने में कठिनाई हो सकती है।

समिति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो प्रभावित लोग आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य हो सकते हैं। समिति ने कहा कि विस्थापित परिवारों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

अधिकारियों से वार्ता की जानकारी

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बैठक के दौरान एचपीपीसीएल के महाप्रबंधक अनूप शर्मा के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। समिति ने उम्मीद जताई कि परियोजना प्रबंधन और संबंधित विभाग विस्थापित परिवारों की समस्याओं को समझते हुए उनके हित में आवश्यक निर्णय लेंगे।

समिति ने यह भी कहा कि बैठक के दौरान रेणुका क्षेत्र के वन विभाग के अधिकारियों से भी चर्चा प्रस्तावित थी, लेकिन समिति के अनुसार निर्धारित समय पर संबंधित अधिकारी उपलब्ध नहीं हो सके।

विस्थापितों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा

बैठक के अंत में संघर्ष समिति ने दोहराया कि वह प्रभावित परिवारों के अधिकारों और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार प्रयास करती रहेगी। समिति ने कहा कि रोजगार, पुनर्वास, आधारभूत सुविधाओं और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी मांगों को पूरा कराने के लिए सभी प्रभावित परिवार एकजुट हैं।

संघर्ष समिति ने सरकार और परियोजना प्रबंधन से मांग की कि विस्थापितों के हितों को प्राथमिकता देते हुए उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास परियोजना और स्थानीय हितों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।