हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस ब्यूरो) को सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे से बाहर करने के निर्णय को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं रणधीर शर्मा ने इस फैसले को असंवैधानिक और तानाशाहीपूर्ण बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना को नुकसान पहुंच सकता है।
संविधान की भावना के खिलाफ बताया फैसला
रणधीर शर्मा ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 संसद द्वारा पारित किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसका उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और नागरिकों को शासन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देना है। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम में संशोधन करने का अधिकार राज्य सरकार को नहीं होता। ऐसे में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा विजिलेंस ब्यूरो को RTI के दायरे से बाहर करने का निर्णय संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
कांग्रेस सरकार पर लगाया आरोप
भाजपा नेता ने कहा कि जिस समय RTI कानून लागू किया गया था, उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि उसी कांग्रेस की सरकार आज हिमाचल प्रदेश में इस कानून की मूल भावना को कमजोर करने का काम कर रही है। रणधीर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार का यह कदम पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ है।
विजिलेंस ब्यूरो की भूमिका पर उठाया सवाल
उन्होंने कहा कि सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का मुख्य कार्य भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करना है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि जनता को यह विश्वास रहे कि जांच निष्पक्ष और ईमानदारी से की जा रही है। लेकिन यदि इस एजेंसी को RTI के दायरे से बाहर कर दिया जाता है तो इससे यह आशंका पैदा होती है कि सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जानकारी सार्वजनिक होने से रोकना चाहती है।
सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप
रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार इस निर्णय के माध्यम से विजिलेंस ब्यूरो का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार इस एजेंसी को RTI से बाहर करके इसे एक तरह से अपनी “कठपुतली” बनाना चाहती है, ताकि वह अपने मनमाफिक कार्य करवा सके। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे सरकार की मंशा पर कई सवाल खड़े होते हैं।
RTI को बताया नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार
भाजपा विधायक ने कहा कि सूचना का अधिकार देश के नागरिकों को मिला एक महत्वपूर्ण अधिकार है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि जनता को शासन से संबंधित जानकारी आसानी से मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी संस्थाओं को RTI से बाहर किया जाता है तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है।
फैसला वापस लेने की मांग
रणधीर शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस निर्णय का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह तुरंत इस फैसले को वापस ले और विजिलेंस ब्यूरो को फिर से RTI के दायरे में लाया जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होती है और किसी भी सरकार को जनता से जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं है।
पारदर्शिता बनाए रखने की अपील
भाजपा नेता ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और सुशासन में विश्वास रखती है तो उसे इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसलिए सरकार को ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे नागरिकों के सूचना के अधिकार को नुकसान पहुंचे।