हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला। रणधीर शर्मा ने पुलिस एवं संबंधित संगठनों की मांग संख्या 7 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सरकार को घेरते हुए प्रदेश की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जिस राज्य में पुलिस महानिदेशक (DGP) जैसे शीर्ष पद पर नियमित नियुक्ति तक नहीं हो रही हो और कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे विभाग चलाया जा रहा हो, वहां कानून व्यवस्था की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी “प्रयोग” किए जा रहे हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।
📊 अपराध के आंकड़ों से जताई चिंता
रणधीर शर्मा ने पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में—
- 270 हत्या के मामले
- 1096 बलात्कार के मामले
- 332 चोरी के मामले
- 9 डकैती के मामले
- 1540 अपहरण के मामले
कुल मिलाकर 5947 गंभीर अपराध दर्ज हुए हैं, जो एक चिंताजनक स्थिति को दर्शाते हैं।
🔫 “गन कल्चर” पर सरकार को घेरा
शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में “गन कल्चर” का विकास मौजूदा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ है।
उन्होंने कहा कि बिलासपुर, ऊना, नालागढ़, मंडी और ज्वाली जैसे क्षेत्रों में गोलीकांड की घटनाएं बढ़ी हैं, जो कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को दर्शाती हैं।
🚫 माफिया राज के आरोप
रणधीर शर्मा ने कहा कि प्रदेश में वन माफिया, खनन माफिया और शराब माफिया पूरी तरह सक्रिय हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में इन माफिया तत्वों को सरकार के संरक्षण के कारण खुली छूट मिली हुई है, जिससे अवैध गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
👮♂️ पुलिस के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप
उन्होंने कहा कि पुलिस का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविक अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
उनके अनुसार सरकार के दबाव के कारण पुलिस की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और वह अपने मूल कार्य—कानून व्यवस्था बनाए रखने—से भटक रही है।
🚨 नशा मुक्ति अभियान पर सवाल
रणधीर शर्मा ने नशा मुक्ति अभियान को “दिखावा” बताते हुए कहा कि तीन वर्षों में सरकार एक भी प्रभावी नशा मुक्ति केंद्र स्थापित नहीं कर पाई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहित करने के बजाय उनका तबादला कर दिया जाता है, जिससे सिस्टम में निराशा का माहौल है।
💻 साइबर अपराधों में बढ़ोतरी
उन्होंने साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई।
शर्मा के अनुसार, वर्ष 2023 में जहां 877 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 18,706 हो गई है, जो एक गंभीर खतरे का संकेत है।
📢 सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सरकार से कई अहम मांगें रखीं—
- पुलिस विभाग में नियमित और सक्षम डीजीपी की नियुक्ति की जाए
- माफिया राज पर सख्त कार्रवाई की जाए
- पुलिस के राजनीतिक दुरुपयोग को तुरंत रोका जाए
- नशा मुक्ति के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं
- पुलिस कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों, वेतन और सुविधाओं में सुधार किया जाए
🔍 सरकार पर सीधा हमला
अंत में रणधीर शर्मा ने कहा कि कानून व्यवस्था किसी भी सरकार की सबसे बड़ी कसौटी होती है, लेकिन इस कसौटी पर वर्तमान कांग्रेस सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते हालात नहीं सुधारे गए, तो इसका प्रदेश की सुरक्षा और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।