हिमाचल प्रदेश की राजनीति में विधायकों की पेंशन को लेकर जारी विवाद के बीच भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 14वीं विधानसभा के दौरान अयोग्य घोषित विधायकों की पेंशन रोकने के लिए लाए गए संशोधन को असंवैधानिक, विधि-विरुद्ध और मनमाना कदम बताया है।
🔹 संशोधन पर गंभीर सवाल
राकेश जमवाल ने कहा कि यह संशोधन उन विधायकों को लक्षित करता है, जिन्हें संविधान के प्रावधानों के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में पहले से ही अयोग्यता से संबंधित स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, जिनके अनुसार यदि कोई सदस्य पार्टी बदलता है या पार्टी लाइन के विरुद्ध जाता है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है।
🔹 पेंशन से जोड़ना ‘गलत व्याख्या’
जमवाल ने कहा कि अयोग्यता का प्रावधान केवल सदस्यता समाप्त करने तक सीमित है और इसमें कहीं भी पेंशन रोकने का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा: “यह कहना कि अयोग्यता के आधार पर पेंशन भी रोकी जाएगी, पूरी तरह से कानून की गलत व्याख्या है। इसका कोई संवैधानिक आधार नहीं है।”
🔹 कानूनी प्रक्रिया पूरी न होने का दावा
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह संशोधन अभी तक कानूनी रूप से प्रभावी नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि किसी भी विधेयक को लागू होने के लिए:
- राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक होती है
- आवश्यक होने पर राष्ट्रपति की मंजूरी भी लेनी पड़ती है
- इसके बाद राजपत्र में प्रकाशित होना जरूरी होता है
जब तक ये प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं, तब तक संशोधन का कोई कानूनी अस्तित्व नहीं होता।
🔹 ‘मनमाना कदम’ करार
राकेश जमवाल ने इस पूरे मामले को मनमाना बताते हुए कहा कि यह कुछ व्यक्तियों को निशाना बनाने के उद्देश्य से किया गया प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस तरह कानून का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और न्यायालय में यह टिक नहीं पाएगा।
🔹 कोर्ट से राहत मिलने का दावा
उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस फैसले से प्रभावित विधायक न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से राहत मिलेगी। इस संदर्भ में उन्होंने चैतन्य ठाकुर और देवेंद्र भुट्टो का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर वे कोर्ट जाते हैं, तो उनकी पेंशन बहाल हो सकती है।
🔹 संविधान सर्वोपरि: जमवाल
राकेश जमवाल ने जोर देते हुए कहा कि संविधान के विपरीत कोई भी कानून लंबे समय तक नहीं टिक सकता। उन्होंने कहा: “कानून मनमाने ढंग से नहीं बनाए जा सकते। संविधान सर्वोपरि है और उसी के अनुसार हर निर्णय लिया जाना चाहिए।”
🔹 राजनीतिक माहौल गरमाया
इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पेंशन विवाद को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां भाजपा इसे संवैधानिक मुद्दा बता रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।