नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने घोषणा की कि आने वाले समय में प्रदेश के स्कूलों में शिक्षा संवाद कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस कार्यक्रम में बच्चों और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी ताकि शिक्षा क्षेत्र में आवश्यक सुधारों पर खुलकर चर्चा हो सके।
वे डीएवी पब्लिक स्कूल घुमारवीं में आयोजित वार्षिक दिवस समारोह “आरोहण 2025” में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि—
शिक्षा भविष्य निर्माण का आधार है।
बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु घर और विद्यालय दोनों में सकारात्मक वातावरण आवश्यक है।
बच्चे तभी रचनात्मक और नवोन्मेषी बन सकते हैं जब उनकी जिज्ञासा और कल्पनाशक्ति को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त होने का अवसर मिले।
मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी शिक्षा की दिशा तय करते हैं — शिक्षा केवल जानकारी नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम है।
हिमाचल का हरित ऊर्जा लक्ष्य: 2026 तक 90% ऊर्जा होगी ‘ग्रीन’
राजेश धर्माणी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश ने वर्ष 2026 तक देश का पहला पूर्ण हरित ऊर्जा राज्य बनने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत—
90% ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त की जाएगी।
ई-टैक्सी, ई-बस, ई-ट्रकों पर 40–50% सब्सिडी दी जा रही है।
सरकारी विभागों में पारंपरिक वाहनों की जगह ई–वाहन शामिल किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने, घरों व उद्योगों में सोलर पैनल लगाने पर सब्सिडी देने, वृक्षारोपण और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने से पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिली है।
पर्यावरण संरक्षण: सामूहिक जिम्मेदारी
मंत्री ने कहा कि—
जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वॉर्मिंग और प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटना पूरी दुनिया का सामूहिक दायित्व है।
हिमाचल में छोटे जलविद्युत परियोजनाओं, जल संसाधन प्रबंधन और वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर सतत विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को सरकार विशेष प्रोत्साहन दे रही है।
युवाओं को संदेश
उन्होंने विद्यार्थियों को सांस्कृतिक व शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यही युवा हिमाचल को हरित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के अग्रदूत होंगे।
समारोह में उन्होंने छात्रों द्वारा लगाई गई विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी का अवलोकन किया और “छोटी सी आशा” विषय पर आधारित नृत्य-नाट्य को विशेष रूप से सराहा।
कार्यक्रम में अनेक अभिभावक, शिक्षक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।