संस्कृत भाषा भारत की ज्ञान परंपरा की आधारशिला
राजेश धर्माणी ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का मूल आधार संस्कृत भाषा रही है। वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, आयुर्वेद, ज्योतिष और दर्शन जैसे महान ग्रंथ संस्कृत में ही रचे गए हैं। वे घुमारवीं के डंगार स्थित राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार में आयोजित वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। मंत्री ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है। इसे संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संरक्षण
राजेश धर्माणी ने कहा कि संस्कृत महाविद्यालय केवल भाषा का शिक्षण नहीं करते, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों का संरक्षण भी करते हैं। इन संस्थानों में विद्यार्थियों को व्याकरण, साहित्य, वेद, वेदांग, न्याय, मीमांसा, दर्शन, कर्मकांड, ज्योतिष और योग जैसे विषयों का गहन अध्ययन कराया जाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत महाविद्यालयों का वातावरण अनुशासित, शांत और आध्यात्मिक होता है। यहां आज भी गुरु-शिष्य परंपरा की झलक देखने को मिलती है, जहां शिक्षक विद्यार्थियों के केवल अकादमिक विकास ही नहीं बल्कि उनके चरित्र निर्माण पर भी विशेष ध्यान देते हैं।
विद्यार्थियों को दिया प्रेरणादायक संदेश
मंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा प्राप्त करते समय अपना शत-प्रतिशत योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में तकनीक ने शिक्षा को आसान बना दिया है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक की भूमिका आज भी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे पढ़ाई के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय भाग लें, ताकि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
शिक्षा क्षेत्र में सरकार के प्रयास
राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार और विकास के लिए कार्य कर रही है। विद्यार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में **केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इस पहल से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का अवसर मिलेगा।
राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों की स्थापना
मंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी विद्यालयों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू की गई है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर और प्रतिस्पर्धी शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि इन पहलों से प्रदेश के सामान्य परिवारों के बच्चों को भी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
क्षेत्र में विकास कार्यों पर खर्च
राजेश धर्माणी ने बताया कि डंगार पंचायत में विभिन्न विकासात्मक कार्यों पर लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार समाज के हर वर्ग के उत्थान, कल्याण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और आने वाले समय में भी कई योजनाओं के माध्यम से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन द्वारा रखी गई मांगों को पूरा करने का भी आश्वासन दिया।
विद्यार्थियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री ने विभिन्न शैक्षणिक, खेलकूद और अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इससे पहले महाविद्यालय के प्रधानाचार्य संदीप ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और कॉलेज का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं, जिन्हें उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक डॉ. दीनानाथ, संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. केशवानंद कौशल, मनोहर लाल, सतपाल महाजन, राकेश सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।