भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सिरमौर जिले के शिलाई विधानसभा क्षेत्र में सैकड़ों चीड़ के पेड़ों के कथित अवैध कटान के मामले को गंभीर बताते हुए प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और प्रशासन की कार्रवाई में देरी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। डॉ. बिंदल ने कहा कि दिन-दहाड़े आरा मशीन लगाकर बड़ी संख्या में चीड़ के पेड़ों की कटाई की गई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इसके बावजूद संबंधित विभाग ने उसी दिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि इससे यह संदेह पैदा होता है कि इस पूरे मामले में कहीं न कहीं सत्ता का संरक्षण शामिल हो सकता है।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि 5 तारीख को दोपहर के समय पेड़ों की कटाई की गई और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। अगले दिन कुछ लोगों ने स्वयं सोशल मीडिया पर आकर यह स्वीकार भी किया कि उन्होंने पेड़ काटे हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने यह दावा किया कि उनके पास 25 पेड़ों की अनुमति है और बाकी अनुमति प्रक्रिया में है। डॉ. बिंदल ने सवाल उठाया कि यदि अनुमति समाप्त हो चुकी थी तो इतने बड़े पैमाने पर कटान कैसे किया गया।
एफआईआर में 307 पेड़ों के कटान का जिक्र
डॉ. बिंदल ने बताया कि भाजपा ने तुरंत इस मामले को उठाया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। इसके बाद 6 तारीख को देर रात एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें लगभग 307 पेड़ों के कटान की बात कही गई। उन्होंने कहा कि एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया कि अंधेरा होने के कारण पेड़ों की पूरी गणना नहीं हो पाई। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि कई दिन बीत जाने के बाद भी पेड़ों की संख्या को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रशासनिक कार्यालयों से 500 मीटर की दूरी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जिस स्थान पर पेड़ों की कटाई हुई, वह एसडीएम कार्यालय, पुलिस थाना और फॉरेस्ट रेंज कार्यालय से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थान पर बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान होना और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी न होना बेहद गंभीर मामला है।
छोटे कर्मचारियों को निलंबित करने पर सवाल
डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि जब भाजपा और जयराम ठाकुर ने इस मुद्दे को उठाया, तब सरकार ने जल्दबाजी में दो छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर मामले को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर देना पर्याप्त नहीं है। इस मामले में जिन अधिकारियों ने अनुमति दी और जिन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अनुमति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों को दो या तीन पेड़ों की अनुमति प्राप्त करने में भी कई महीनों का समय लग जाता है। ऐसे में 25 पेड़ों की अनुमति किस आधार पर दी गई, यह भी जांच का विषय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अनुमति 25 फरवरी को समाप्त हो चुकी थी, तो उसके बाद भी इतने बड़े पैमाने पर कटान कैसे किया गया।
आंदोलन की चेतावनी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भारतीय जनता पार्टी प्रदेशभर में आंदोलन करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में वन माफिया सक्रिय हो रहे हैं और यदि सरकार ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए तो पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है।
केंद्र और राज्य सरकार पर भी टिप्पणी
डॉ. बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जहां लगभग ₹18,000 करोड़ राजस्व घाटा अनुदान मिला था, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को ₹89,000 करोड़ से अधिक की सहायता प्रदान की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र से मिलने वाली राशि का सही उपयोग नहीं किया जा रहा और सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई है।
सिरमौर के साथ सौतेला व्यवहार का आरोप
डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश सरकार सिरमौर जिले के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सिरमौर और प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी और यदि सरकार ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो पार्टी जनता के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।