भोरंज में ‘पोषण भी पढ़ाई भी’ प्रशिक्षण संपन्न

rakesh nandan

13/03/2026

दिव्यांग बच्चों की स्क्रीनिंग और समावेशन पर विशेष सत्र

प्रशिक्षण के तीसरे दिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिव्यांग बच्चों से संबंधित विभिन्न प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान आंगनवाड़ी प्रोटोकॉल फॉर दिव्यांग चिल्ड्रन, समावेशन के अधिकार, स्क्रीनिंग शेड्यूल तथा इनक्लूजन रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रशिक्षण में इन विषयों को समझाने के लिए समूह चर्चा, केस स्टडी और व्यवहारिक उदाहरणों का भी उपयोग किया गया, जिससे प्रतिभागियों को विषय को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।


नवचेतना कार्यक्रम के तहत बच्चों के विकास पर चर्चा

प्रशिक्षण के दौरान नवचेतना कार्यक्रम के अंतर्गत 0 से 3 वर्ष तक के बच्चों के लिए स्टिमुलेशन एक्टिविटी कैलेंडर के बारे में भी जानकारी दी गई। इस सत्र में बच्चों के प्रारंभिक विकास के लिए आवश्यक गतिविधियों, देखभाल तथा पालन-पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीवन के शुरुआती वर्षों में बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए सही पोषण और उचित देखभाल अत्यंत आवश्यक होती है।


बच्चों के सीखने और विकास के आकलन की जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के सीखने और विकास के आकलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी जानकारी दी गई। इस दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न असेसमेंट टूल्स, चाइल्ड पोर्टफोलियो तैयार करने की प्रक्रिया और मासिक ECCE दिवस के महत्व के बारे में बताया गया। ECCE दिवस के माध्यम से बच्चों के विकास की नियमित समीक्षा और उनकी सीखने की प्रगति का आकलन किया जाता है, जिससे उनके समग्र विकास को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकता है।


श्रेष्ठ प्रथाओं की जानकारी भी दी गई

प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में प्रतिभागियों को विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही श्रेष्ठ प्रथाओं (Best Practices) के बारे में भी जानकारी दी गई। इन उदाहरणों के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को यह समझाया गया कि किस प्रकार विभिन्न राज्यों में बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इससे प्रतिभागियों को अपने क्षेत्र में भी बेहतर तरीके से इन कार्यक्रमों को लागू करने की प्रेरणा मिली।


बच्चों के विकास की मजबूत नींव है पोषण और प्रारंभिक शिक्षा

इस अवसर पर सुनील कुमार ने कहा कि बच्चों के जीवन की प्रारंभिक अवस्था में पोषण और प्रारंभिक शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यही वह समय होता है जब बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की मजबूत नींव रखी जाती है। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी और कौशल को अपने-अपने आंगनवाड़ी केंद्रों में प्रभावी ढंग से लागू करें।


प्रतिभागियों को दिए गए प्रमाण पत्र

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों से पोस्ट टेस्ट क्विज़ और फीडबैक भी लिया गया। इसके बाद सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रमाण पत्र वितरित किए गए।


कई अधिकारी और कर्मचारी रहे उपस्थित

इस कार्यक्रम में कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनमें—

  • वृत्त पर्यवेक्षक रवि कुमार

  • सुनील नड्डा

  • आशा रानी

  • कुंता राणा

  • सरोजां ठाकुर

  • अंजना शर्मा

  • अभिषेक ठाकुर

  • सुनीता धीमान

  • खंड समन्वयक अक्षय महाजन

  • लक्ष्मण राम

शामिल रहे।


पोषण अभियान का उद्देश्य

पोषण अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में कुपोषण को कम करना तथा उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार करना है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान किया जाता है, ताकि वे जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।