10 दिवसीय मशरूम प्रशिक्षण शिविर का समापन
पंजाब नेशनल बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) द्वारा आयोजित दस दिवसीय मशरूम खेती प्रशिक्षण शिविर 2 मार्च को संपन्न हो गया। इस शिविर में कुल 30 प्रतिभागियों ने भाग लेकर मशरूम उत्पादन की तकनीकी जानकारी प्राप्त की। यह प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
प्रतिभागियों को दी गई व्यावहारिक जानकारी
प्रशिक्षण शिविर के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम की विभिन्न प्रजातियों, बीज चयन, कंपोस्ट तैयार करने की विधि, तापमान और आर्द्रता नियंत्रण, रोग प्रबंधन तथा विपणन संबंधी जानकारी दी गई। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को छोटे स्तर से व्यवसाय शुरू करने और कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीक सिखाई। मशरूम खेती को कम भूमि और सीमित संसाधनों में शुरू किया जा सकता है, जिससे यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक लाभकारी व्यवसाय विकल्प बनता जा रहा है।
समापन समारोह में शुभकामनाएं
समापन अवसर पर आरसेटी के निदेशक अजय कुमार कतना ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि मशरूम खेती स्वरोजगार का सशक्त माध्यम है और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रतिभागी इसे आय के स्थायी स्रोत में बदल सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को बैंकिंग सुविधाओं और वित्तीय सहायता योजनाओं की जानकारी भी दी।
विशेषज्ञों की उपस्थिति
समारोह में शिविर के मूल्यांकनकर्ता सोमदत्त शर्मा और देवी लाल, वित्तीय साक्षरता सलाहकार जीसी भट्टी, फैकल्टी मेंबर संजय हरनोट, ट्रेनर विद्यासागर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। वित्तीय साक्षरता सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को ऋण योजनाओं, बचत, बीमा और उद्यम स्थापना से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।
स्वरोजगार को बढ़ावा
आरसेटी का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। मशरूम खेती जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कम निवेश में उच्च आय की संभावनाएं प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामूहिक उत्पादन कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं।
भविष्य की योजनाएं
संस्थान द्वारा भविष्य में भी विभिन्न व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वरोजगार से जुड़ सकें। प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को आवश्यक मार्गदर्शन और फॉलो-अप सहायता भी उपलब्ध करवाई जाएगी, जिससे वे अपने उद्यम को सफलतापूर्वक स्थापित कर सकें।