लोकसभा में उठा परवाणू–शिमला फोरलेन परियोजना का मुद्दा
सुरेश कश्यप द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने परवाणू–शिमला चार लेन परियोजना की प्रगति, लागत और देरी के कारणों पर विस्तृत जानकारी दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने लोकसभा में दिए अपने लिखित उत्तर में बताया कि परियोजना के विभिन्न हिस्सों में कार्य प्रगति पर है और कई महत्वपूर्ण खंडों में निर्माण कार्य पूर्ण भी हो चुका है।
सांसद ने मांगी थी विस्तृत जानकारी
लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के माध्यम से सांसद सुरेश कश्यप ने सरकार से यह जानकारी मांगी थी कि—
परवाणू–शिमला चार लेन परियोजना के लिए अब तक कितनी राशि स्वीकृत की गई है
परियोजना की वास्तविक और वित्तीय प्रगति क्या है
कार्य में देरी के प्रमुख कारण क्या हैं
इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि मानसून के दौरान इस मार्ग पर बार-बार होने वाले भूस्खलन और यातायात बाधा की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
परवाणू–सोलन खंड का कार्य पूरा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परियोजना के परवाणू–सोलन खंड (एनएच-22 / नया एनएच-05) के किमी 67.000 से किमी 106.139 तक चार लेन निर्माण के लिए 1683.31 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई थी।
इस खंड में—
100 प्रतिशत वास्तविक प्रगति
100 प्रतिशत वित्तीय प्रगति
दर्ज की जा चुकी है और इस हिस्से का निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा हो चुका है।
सोलन–कैथलीघाट खंड में 91 प्रतिशत प्रगति
इसी प्रकार सोलन–कैथलीघाट खंड (किमी 106.139 से किमी 129.050) के चार लेन निर्माण के लिए 1519.53 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।
इस खंड में अब तक—
91.05 प्रतिशत वास्तविक प्रगति
86.03 प्रतिशत वित्तीय प्रगति
दर्ज की गई है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस खंड के लिए 24 नवंबर 2025 को पीसीसी (Provisional Completion Certificate) जारी किया जा चुका है।
शिमला बाईपास पैकेज पर कार्य जारी
परियोजना के अंतर्गत कैथलीघाट से शकराल/ढली क्षेत्र तक शिमला बाईपास पैकेज के तहत लगभग 2742.91 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य किया जा रहा है।
इस हिस्से में वर्तमान में—
53 प्रतिशत वास्तविक प्रगति
51.5 प्रतिशत वित्तीय प्रगति
दर्ज की गई है और निर्माण कार्य जारी है।
शकराल–ढली खंड में भी निर्माण जारी
इसी तरह शकराल–ढली खंड (डिजाइन लंबाई लगभग 10.985 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 3005.24 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है।
इस खंड में—
51.54 प्रतिशत वास्तविक प्रगति
54.04 प्रतिशत वित्तीय प्रगति
दर्ज की गई है।
देरी के पीछे कई कारण
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परियोजना के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य में देरी के पीछे कई कारण रहे हैं।
इनमें मुख्य रूप से—
2023 और 2025 में हुई अत्यधिक भारी वर्षा
पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं
कुछ स्थानों पर डंपिंग साइट की उपलब्धता की समस्या
जैसे कारण शामिल हैं।
85 संवेदनशील स्थानों की पहचान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा परवाणू–सोलन–कैथलीघाट मार्ग पर 85 संवेदनशील स्थलों की पहचान की गई है।
इनमें से—
65 स्थानों पर स्थायी ढलान सुरक्षा कार्य पूरे किए जा चुके हैं
शेष स्थानों पर कार्य जारी है।
भूस्खलन से निपटने के लिए विशेष उपाय
सरकार द्वारा इस मार्ग पर भूस्खलन की समस्या को कम करने के लिए कई तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं।
इनमें—
ढलान स्थिरीकरण (Slope Stabilization)
बेहतर जल निकासी प्रणाली
स्थायी संरचनाओं का निर्माण
जैसे उपाय शामिल हैं।
पर्यटन और व्यापार को मिलेगा लाभ
सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से परवाणू–शिमला फोरलेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से हिमाचल प्रदेश में—
पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
व्यापार और परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी
यात्रा का समय कम होगा
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है और भविष्य में हिमाचल प्रदेश को इसका बड़ा लाभ मिलेगा।