पांवटा साहिब में पेयजल संकट, योजना बनी सफेद हाथी

rakesh nandan

03/04/2026

Paonta Sahib क्षेत्र में गर्मी का मौसम शुरू होते ही पेयजल संकट गहराने लगा है। कई इलाकों में पेयजल योजनाओं में तकनीकी समस्याओं और जल स्रोतों में कमी के कारण लोगों को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में विभागीय योजनाएं होने के बावजूद नियमित पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

इसी मुद्दे को लेकर श्री पांवटा साहिब विकास मंच के अध्यक्ष Gyan Singh Chauhan ने पत्रकारवार्ता में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी गिरि शमयाला रुदाना उठाऊ पेयजल योजना आज भी लोगों के लिए किसी काम की नहीं है।

📊 करोड़ों की योजना, फिर भी पानी नहीं

ज्ञान सिंह चौहान ने बताया कि यह योजना वर्ष 2007 में स्वीकृत हुई थी, लेकिन निर्माण कार्य लंबे समय तक अधर में लटका रहा। इसके बाद वर्ष 2022 में इस योजना का उद्घाटन कर दिया गया, जबकि यह पूरी तरह से तैयार भी नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि उद्घाटन के बावजूद आज तक ग्रामीणों को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिला है और वे अब भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।

📍 प्रभावित गांव

इस पेयजल योजना से आंज-भोज क्षेत्र के कई गांव जुड़े हुए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • रुदाना
  • थड़ा
  • पाब
  • कोफर

इन गांवों के लोग आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी दैनिक जीवनचर्या प्रभावित हो रही है।

⚠️ ‘सफेद हाथी’ बनी योजना

स्थानीय लोगों ने इस योजना को “सफेद हाथी” करार दिया है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि लोगों को पानी नहीं मिल रहा, तो यह योजना पूरी तरह विफल मानी जाएगी।

💧 जल स्रोतों में कमी भी बनी वजह

क्षेत्र में जल स्रोतों में कमी आने के कारण भी पेयजल संकट बढ़ा है। गर्मियों के दौरान पानी की मांग बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण और योजनाओं के सही क्रियान्वयन के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

📢 प्रशासन से मांग

स्थानीय लोगों और विकास मंच ने प्रशासन से मांग की है कि इस योजना की जांच करवाई जाए और जल्द से जल्द इसे पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

🎯 निष्कर्ष

कुल मिलाकर, पांवटा साहिब में पेयजल संकट एक गंभीर समस्या बनकर उभर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी योजनाओं का लाभ अगर जनता तक नहीं पहुंचता, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

समय रहते इस समस्या का समाधान करना बेहद जरूरी है, ताकि आने वाले दिनों में लोगों को और अधिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।