दून घाटी का गुड़ देश-विदेश में बना पहचान

rakesh nandan

01/04/2026

Paonta Sahib की दून घाटी इन दिनों अपने पारंपरिक और शुद्ध गुड़ के लिए देश-विदेश में पहचान बना रही है। यहां तैयार होने वाला गुड़ अपनी गुणवत्ता, स्वाद और शुद्धता के कारण बाजार में विशेष मांग रखता है।

दून घाटी में इन दिनों दर्जनों चर्खियों (परंपरागत भट्टियों) में गुड़ बनाने का कार्य जोरों पर चल रहा है। खेतों से ताजा गन्ना लाकर उसे पारंपरिक तरीके से उबालकर गुड़ तैयार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के कैमिकल या मिलावट का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे यह गुड़ पूरी तरह प्राकृतिक और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

स्थानीय किसानों के अनुसार इस क्षेत्र में गन्ने का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है। यहां की मिट्टी और जलवायु गन्ने की खेती के लिए अनुकूल है, जिससे गन्ने में शुगर की मात्रा अधिक होती है। यही कारण है कि दून घाटी का गुड़ अन्य क्षेत्रों के मुकाबले अधिक स्वादिष्ट और उच्च गुणवत्ता वाला होता है।

गुड़ खरीदने पहुंचे स्थानीय निवासी सुनील तोमर और प्रमोद कुमार ने बताया कि वे कई वर्षों से यहां से गुड़ और शक्कर खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि यहां तैयार किया जाने वाला गुड़ पूरी तरह शुद्ध होता है और इसमें किसी भी प्रकार की मिलावट नहीं होती। यही वजह है कि लोग दूर-दराज के क्षेत्रों से भी यहां गुड़ खरीदने आते हैं।

उन्होंने बताया कि दून घाटी का गुड़ न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ती जा रही है, जिससे स्थानीय किसानों और कामगारों को अच्छा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

गुड़ बनाने में लगे कामगारों का कहना है कि पांवटा साहिब क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने का उत्पादन होता है, जिससे बेहतर किस्म का गुड़ तैयार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक चर्खियों में गुड़ बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी होती है और इसमें किसी भी प्रकार का रसायन इस्तेमाल नहीं किया जाता।

गुड़ बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले गन्ने का रस निकाला जाता है, जिसे बड़े कड़ाहों में उबालकर गाढ़ा किया जाता है। इसके बाद इसे ठंडा करके गुड़ के रूप में ढाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया में अनुभव और कौशल की जरूरत होती है, जिसे स्थानीय कारीगर वर्षों से अपनाते आ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना कैमिकल के तैयार होने वाला यह गुड़ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। इसमें आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं।

दून घाटी का यह पारंपरिक उद्योग न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है। इससे किसानों और मजदूरों दोनों को लाभ मिल रहा है।

कुल मिलाकर, दून घाटी का गुड़ अपनी गुणवत्ता और शुद्धता के कारण देश-विदेश में पहचान बना रहा है और आने वाले समय में इसकी मांग और बढ़ने की संभावना है। यह स्थानीय कृषि और परंपरागत उद्योग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आधुनिक बाजार में भी अपनी जगह बनाए हुए है।