शिमला || 16 जुलाई 2025 || हिमाचल प्रदेश में नेशनल हाईवे और फोरलेन निर्माण के खिलाफ उठे मुद्दों पर हिमाचल किसान सभा और सीटू द्वारा आयोजित प्रदर्शन ने स्थानीय समस्याओं को उजागर किया है। प्रदर्शनों में शामिल कई नेताओं और प्रभावित लोगों ने उच्च आवाज में अपनी कठिनाइयों और मांगों को व्यक्त किया।
1. **नुकसान के मुद्दे**: स्थानीय निवासियों के मकान के क्षति, निर्माण कार्यों के कारण अवैज्ञानिक कटिंग, अवैध माइनिंग और डंपिंग के चलते जिनके घर और जमीन प्रभावित हुए हैं, उनके लिए उचित मुआवजे की मांग की गई।
2. **रोजगार की कमी**: यह आरोप लगाया गया कि एनएचएआई और संबंधित निर्माण कंपनियाँ स्थानीय लोगों को रोजगार देने में असफल रहीं हैं, जबकि उन्हें स्थानीय जनसंख्या के लिए 80 प्रतिशत रोजगार देने का कानूनी प्रावधान है।
3. **श्रमिकों का शोषण**: प्रदर्शनकारियों ने श्रमिकों के लिए अत्यंत खराब कार्य परिस्थितियों, जैसे लंबे कार्य घंटे, न्यूनतम वेतन का न मिलने, और बाउंसर्स द्वारा धमकी देने की घटनाओं को भी उजागर किया।
4. **पर्यावरणीय उपाय**: धूल-मिट्टी से होने वाले नुकसान के अलावा, स्थानीय कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में भी चिंता जताई गई। अधिकारियों से उचित मुआवजे और सुरक्षा उपायों की मांग की गई।
5. **संयुक्त मोर्चा**: यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो 7 अगस्त को और बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी गई। नेताओं ने सरकार और अधिकारियों के गठजोड़ पर भी सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने कहा कि ये लोग स्थानीय संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने एनएचएआई क्षेत्रीय निदेशक से मुलाकात की और अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखा। वे गावर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग कर रहे हैं, जिससे भविष्य में इस प्रकार के मुद्दों से बचा जा सके।
हिमाचल किसान सभा और सीटू ने स्थानीय समुदाय की प्रति उनकी मांगों को समर्थन देने और उनकी आवाज उठाने के लिए लगातार संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है। यह घटना प्रदेश में स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।