बचत भवन बिलासपुर में शनिवार को मादक द्रव्यों से जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन अभियोजन निदेशालय हिमाचल प्रदेश द्वारा किया गया, जिसमें मादक पदार्थों की जब्ती के बाद अपनाई जाने वाली सीलिंग, नमूना संग्रहण तथा विधिसम्मत नष्ट करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। यह कार्यशाला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित छठी राज्य स्तरीय एनकॉर्ड (NCORD) समिति के तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता राहुल कुमार ने की।
विभिन्न जिलों के अधिकारी हुए शामिल
कार्यशाला में कई वरिष्ठ अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इनमें संजीव कटोच, पुलिस अधीक्षक संदीप धवल, संयुक्त निदेशक अभियोजन रणधीर परमार और जिला न्यायवादी सी. एस. भाटिया सहित कई अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, हमीरपुर, ऊना, सोलन और शिमला जिलों के जिला न्यायवादी और सहायक जिला न्यायवादी भी इस कार्यशाला में उपस्थित रहे। सेमिनार में विशेषज्ञ के रूप में राकेश सोनी और भीष्म चंद (जिला न्यायवादी, उच्च शिक्षा शिमला) ने भी प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी।
जिले में 570 एनडीपीएस मामले लंबित
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत वर्तमान में 570 मामले लंबित हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 51 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इन मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए पुलिस, अभियोजन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय होना अत्यंत आवश्यक है।
विभागों के समन्वय से बेहतर परिणाम संभव
अभियोजन निदेशक संजीव कटोच ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली कमियों को दूर करने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियां, अभियोजन विभाग और अन्य संबंधित संस्थाएं मिलकर काम करें तो मादक पदार्थों से जुड़े मामलों के निपटान में और अधिक प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।
कानूनी प्रक्रियाओं का पालन बेहद जरूरी
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ अधिकारियों ने बताया कि मादक द्रव्य एवं मनोप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि जब्त किए गए मादक पदार्थों का सुरक्षित संरक्षण, नमूनों का सही तरीके से संग्रहण और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उनका निस्तारण न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। यदि इन प्रक्रियाओं का पालन विधिसम्मत तरीके से किया जाता है तो अदालत में मामलों की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों की विश्वसनीयता बनी रहती है और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
साक्ष्य संरक्षण और दस्तावेजीकरण पर जोर
विशेषज्ञों ने बताया कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच के दौरान साक्ष्य संरक्षण, दस्तावेजीकरण और कानूनी औपचारिकताओं का पालन बेहद आवश्यक होता है। यदि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से की जाए तो न्यायालय में मामलों के निपटारे में भी आसानी होती है। उन्होंने अधिकारियों को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह भी समझाया कि जांच के दौरान की गई छोटी-सी गलती भी अदालत में मामले को कमजोर कर सकती है।
अधिकारियों को दी गई व्यावहारिक जानकारी
इस कार्यशाला के माध्यम से अधिकारियों को एनडीपीएस अधिनियम से संबंधित विभिन्न प्रावधानों और प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भविष्य में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच अधिक प्रभावी तरीके से की जा सके और अदालतों में इन मामलों के निपटान में किसी प्रकार की कानूनी बाधा न आए। बैठक में विभिन्न जिलों से आए सभी संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई के लिए बेहतर समन्वय पर जोर दिया।