प्राकृतिक खेती से हल्दी उगाकर कपिला दंपत्ति बने मिसाल

rakesh nandan

20/01/2026

प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने तथा इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयास अब सकारात्मक और प्रेरणादायक परिणाम देने लगे हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं को 60 रुपये, मक्की को 40 रुपये तथा कच्ची हल्दी को 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदने की प्रदेश सरकार की नीति किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। इसी योजना से प्रेरित होकर भोरंज उपमंडल की ग्राम पंचायत भुक्कड़ के गांव बैरी ब्राह्मणा के शिक्षाविद सुभाष कपिला और उनकी धर्मपत्नी उर्मिला कपिला ने इस सीजन में प्राकृतिक विधि से लगभग 10 क्विंटल हल्दी का उत्पादन कर क्षेत्र के किसानों और बागवानों के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

76 वर्षीय सुभाष कपिला, जो स्कूल प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं, तथा उनकी धर्मपत्नी उर्मिला कपिला, जो शिक्षा विभाग से टीजीटी पद से सेवानिवृत्त हैं, आज भी खेती से जुड़े हुए हैं। उनका परिवार उच्च शिक्षित होने के बावजूद खेती से जुड़ा रहकर समाज को सकारात्मक संदेश दे रहा है। वे अपने खेतों में रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते। प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और इस पद्धति से उगाई गई फसलों के लिए उच्च समर्थन मूल्य तय किए जाने के बाद कपिला दंपत्ति ने हल्दी की खेती करने का निर्णय लिया। उन्होंने कृषि विभाग की एसएमएस मोनिका शर्मा सहित विभागीय अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त किया तथा विभाग से हल्दी का बीज भी लिया।

सुभाष कपिला ने बताया कि हल्दी की खेती में कम मेहनत, कम लागत और जंगली जानवरों से न्यूनतम नुकसान होता है। इसके लिए किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद या कीटनाशक की आवश्यकता नहीं पड़ती। प्रदेश सरकार द्वारा 90 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद किए जाने के कारण यह खेती किसानों के लिए लाभकारी और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरी है। कपिला दंपत्ति की यह सफलता प्राकृतिक खेती को अपनाने के इच्छुक किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है और यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से खेती को लाभ का साधन बनाया जा सकता है।