हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रयास अब प्रभावी परिणाम दे रहे हैं। प्रदेशभर में हजारों किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर लौट रहे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
मुख्यमंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र नादौन की ग्राम पंचायत ग्वालपत्थर भी प्राकृतिक खेती का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है। यहां के कई किसान प्राकृतिक तरीकों से सब्जी उत्पादन कर रहे हैं और आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।
कुसुम लता और मदन लाल: प्राकृतिक खेती से लाखों की कमाई
गांव जमनोटी के साथ लगते गांव की प्रगतिशील किसान कुसुम लता और उनके पति मदन लाल, जो होमगार्ड्स से सेवानिवृत्त हैं, ने लगभग तीन वर्ष पहले आतमा परियोजना के मार्गदर्शन में प्राकृतिक खेती शुरू की।
आज वे अपनी 5 कनाल भूमि में
मूली
फूल गोभी
बंद गोभी
पीली गोभी
ब्रॉकली
मटर
अन्य मौसमी सब्जियों
का उत्पादन कर रहे हैं और एक सीजन में 2.5 से 3 लाख रुपये तक की आय हासिल कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उनके खेतों में
रासायनिक खाद का कोई उपयोग नहीं,
जहरीले कीटनाशक पूरी तरह बंद,
केवल गोबर की खाद, जीवामृत और घर में तैयार प्राकृतिक घोल का प्रयोग किया जाता है।
कमल किशोर का उदाहरण: लगभग शून्य लागत में उत्कृष्ट उत्पादन
इसी पंचायत के किसान कमल किशोर भी प्राकृतिक खेती का शानदार उदाहरण हैं। वे केवल गोबर खाद और जीवामृत के सहारे सब्जियां उगा रहे हैं। उनका कहना है कि
खेती का खर्च लगभग शून्य हो गया है,
उत्पादन बेहतर हो रहा है,
उत्पाद का बाजार मूल्य भी अधिक मिल रहा है,
और जमीन की उर्वरा शक्ति लगातार बनी रहती है।
डबल फायदा: सुरक्षित फसल और अधिक आय
प्राकृतिक खेती से
स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित सब्जियां,
कम लागत,
ज्यादा मुनाफा,
पर्यावरण की सुरक्षा,
और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
जैसे अनेक लाभ मिल रहे हैं। यही कारण है कि ग्वालपत्थर पंचायत के किसान तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
ग्वालपत्थर पंचायत बनी प्राकृतिक खेती का प्रेरणादायक मॉडल
मुख्यमंत्री सुक्खू की पहल से नादौन क्षेत्र के किसानों ने साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और इच्छाशक्ति हो तो प्राकृतिक खेती न केवल संभव है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति बदलने का शक्तिशाली माध्यम भी है।
आज ग्वालपत्थर पंचायत में प्राकृतिक खेती किसानों के जीवन में खुशहाली ला रही है और भविष्य के लिए एक स्थायी मॉडल बनकर उभर रही है।