प्राकृतिक खेती से बदली किसानों की किस्मत, बढ़ी आमदनी

rakesh nandan

02/02/2026

प्रदेश सरकार की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नीति अब धरातल पर सकारात्मक परिणाम दिखा रही है। ‘सुख की सरकार’ के प्रोत्साहन से जोगिंदर नगर उपमंडल के विकास खण्ड चौंतड़ा के गांव टिक्करी मुशैहरा निवासी अजय कुमार और ग्राम पंचायत सगनेहड़ की कमला देवी के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। प्राकृतिक खेती के माध्यम से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है और वे ग्रामीण आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर उभरे हैं।

अजय कुमार वर्ष 2003 से प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती वर्षों में प्राकृतिक फसलों के लिए न तो बाजार व्यवस्था थी और न ही उचित मूल्य निर्धारित था। वर्तमान राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किए जाने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने लगा है। हाल ही में अजय कुमार ने दो क्विंटल मक्की सरकार को एमएसपी पर बेचकर छह हजार रुपये से अधिक की आमदनी प्राप्त की, जिसके लिए उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया।

ग्राम पंचायत सगनेहड़ की कमला देवी वर्ष 2018 से प्राकृतिक खेती कर रही हैं। बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के खेती करने से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी फायदे भी मिले हैं। कमला देवी के साथ लगभग 20 महिलाओं का समूह सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ा रहा है। इस समूह ने दो क्विंटल मक्की और छह क्विंटल गेहूं सरकार को एमएसपी पर बेचा। साथ ही परिवहन के लिए प्रति क्विंटल दो रुपये के हिसाब से किराया भी दिया गया, जिससे समूह को कुल 37 हजार 200 रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ।

अजय कुमार और कमला समूह केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्राकृतिक तरीके से सब्जियां, रागी तथा अन्य फसलें भी उगा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार आत्मा परियोजना के तहत कमला समूह को गांव में ही दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर प्राकृतिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद समूह द्वारा उत्पादित प्राकृतिक रागी को व्यापारी अच्छे दामों पर खरीद रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए मक्की का एमएसपी 40 रुपये प्रति किलो, गेहूं का 60 रुपये प्रति किलो तथा प्राकृतिक हल्दी का 90 रुपये प्रति किलो मूल्य निर्धारित किया गया है। इससे क्षेत्र के किसानों का रुझान तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहा है।

कमला देवी ने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल आमदनी का बेहतर साधन मिलता है, बल्कि परिवार को शुद्ध और सुरक्षित भोजन भी उपलब्ध होता है। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। अजय कुमार और कमला समूह की यह सफलता कहानी इस बात का प्रमाण है कि सरकार की सही नीतियां, प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और किसानों की मेहनत मिलकर प्राकृतिक खेती को ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बना सकती हैं।