राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर कर्ण नंदा का संदेश: “जनता की आवाज़ को सशक्त बनाना, लोकतंत्र को मज़बूत बनाना”

rakesh nandan

17/11/2025

भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस 2025 पर पत्रकार समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पत्रकारिता सदियों से “जनता की आवाज़ को सशक्त बनाने और लोकतंत्र को मजबूती देने” की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि 16 नवंबर का दिन भारतीय प्रेस परिषद की स्थापना का प्रतीक है और यह प्रेस की स्वतंत्रता एवं जिम्मेदार पत्रकारिता के प्रति सम्मान दर्शाता है।

कर्ण नंदा ने बताया कि भारत में पत्रकारिता तेजी से सशक्त हो रही है। देश में पंजीकृत प्रकाशनों की संख्या 2004-05 में 60,143 से बढ़कर 2024-25 में 1.54 लाख हो गई है। यह भारतीय मीडिया की बढ़ती ऊर्जा और पत्रकारिता पर जनता के विश्वास को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम, 1955 तथा प्रेस एवं पत्रिका पंजीकरण अधिनियम, 2023 जैसे सुधारों ने न केवल पत्रकारों के अधिकारों को मजबूत किया है, बल्कि मीडिया विनियमन को आधुनिक ढांचा भी प्रदान किया है।


पत्रकार कल्याण योजना में 2019 का बड़ा संशोधन

कर्ण नंदा ने विस्तार से बताया कि पत्रकार कल्याण योजना, जो वर्ष 2001 में शुरू हुई थी, में 2019 में अहम संशोधन किए गए। इसके अंतर्गत—

  • पत्रकार की मृत्यु की स्थिति में परिवार को 5 लाख रुपये तक की सहायता

  • स्थायी विकलांगता पर 5 लाख रुपये तक सहायता

  • कैंसर, किडनी फेल्योर, हार्ट सर्जरी, स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए 3 लाख रुपये तक सहायता

  • दुर्घटना से संबंधित गंभीर चोटों पर 2 लाख रुपये तक आर्थिक मदद

  • गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए सहायता उनकी कार्यावधि के अनुसार सीमित

उन्होंने कहा कि यह योजना संकट की स्थिति में पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करती है।


भारतीय प्रेस परिषद: इतिहास और भूमिका

कर्ण नंदा ने बताया कि—

  • भारतीय प्रेस परिषद (PCI) की स्थापना 1966 में हुई थी

  • मूल अधिनियम 1965 का था, जिसे 1975 में निरस्त कर नया अधिनियम लागू किया गया

  • 1979 में परिषद का पुनर्गठन किया गया

  • यह एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय है, जिसकी जिम्मेदारी पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखना और प्रेस को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखना है

उन्होंने कहा कि पहली बार 1956 के प्रथम प्रेस आयोग ने प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा के उद्देश्य से ऐसी संस्था की सिफारिश की थी।