ऊना लोक अदालत में 4704 मामलों का निपटारा

rakesh nandan

14/03/2026

जिला एवं सत्र न्यायालय ऊना और उपमंडल अंब स्थित न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस लोक अदालत की अध्यक्षता नरेश कुमार ने की। लोक अदालत के दौरान आपसी सहमति और समझौते के आधार पर बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा किया गया। कुल 4704 मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया, जिनमें लगभग 97 लाख 88 हजार 191 रुपये की राशि से जुड़े समझौते भी शामिल रहे।


लोक अदालत का उद्देश्य त्वरित न्याय

इस संबंध में जानकारी देते हुए अनिता शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को सरल, त्वरित और सुलभ न्याय प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया जाता है, जिनमें पक्षकार समझौते के लिए तैयार होते हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया तेज होती है और लोगों को लंबे समय तक अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।


कई प्रकार के मामलों की हुई सुनवाई

लोक अदालत के दौरान विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई की गई और आपसी सहमति से उनका समाधान किया गया।

इनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • आपराधिक कंपाउंडेबल मामले

  • दीवानी विवाद

  • चेक बाउंस से संबंधित धारा 138 एन.आई. अधिनियम के मामले

  • उपभोक्ता शिकायतें

  • मोटर व्हीकल चालान

  • धन वसूली से जुड़े मामले

इन मामलों में दोनों पक्षों की सहमति से समझौते कराए गए और उनका त्वरित निपटारा किया गया।


न्यायालयों का बोझ कम करने में सहायक

लोक अदालत न्यायिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लंबित मामलों का समाधान संभव हो पाता है। अधिकारियों के अनुसार लोक अदालत से न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होता है और न्याय व्यवस्था अधिक प्रभावी बनती है। जब विवाद आपसी सहमति से सुलझ जाते हैं तो दोनों पक्षों को भी मानसिक और आर्थिक राहत मिलती है।


समय और धन दोनों की बचत

लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें मामलों का समाधान अपेक्षाकृत कम समय में हो जाता है। सामान्य अदालतों में मामलों की सुनवाई में कई बार लंबा समय लग जाता है, जबकि लोक अदालत में समझौते के आधार पर विवादों का समाधान शीघ्र हो जाता है। इसके साथ ही पक्षकारों का समय और धन दोनों की बचत होती है।


आपसी समझदारी से समाधान

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनिता शर्मा ने कहा कि लोक अदालत आपसी समझदारी और सहमति के आधार पर विवादों को सुलझाने का प्रभावी माध्यम है। इस व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को समझौते के लिए प्रेरित किया जाता है और न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में समाधान निकाला जाता है। इससे न केवल विवाद समाप्त होता है बल्कि पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध भी बनाए रखने में मदद मिलती है।


आम जनता के लिए लाभकारी व्यवस्था

लोक अदालत की व्यवस्था आम नागरिकों के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है। इसके माध्यम से लोग बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के अपने विवादों का समाधान कर सकते हैं। इससे न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सरल और सुलभ बनती है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे भविष्य में भी लोक अदालतों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और आपसी सहमति से विवादों का समाधान करें।