बिलासपुर लोक अदालत में 3810 मामलों का निपटारा

rakesh nandan

14/03/2026

जिला बिलासपुर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मामलों का आपसी सहमति के आधार पर निपटारा किया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए ज्योत्सना सुमन्त डढवाल ने बताया कि जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण बिलासपुर के तत्वावधान में जिले के सभी न्यायालयों में लोक अदालत का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को त्वरित, सस्ता और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था के माध्यम से पक्षकार आपसी सहमति से अपने विवादों का समाधान कर सकते हैं, जिससे न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या भी कम होती है।


3977 मामलों को रखा गया निपटारे के लिए

अध्यक्ष ज्योत्सना सुमन्त डढवाल ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 3977 मामलों को निपटारे के लिए रखा गया था

इनमें

  • 3860 मामले न्यायालयों में लंबित थे

  • जबकि 117 मामले पूर्व मुकदमेबाजी (प्री-लिटिगेशन) से संबंधित थे।

लोक अदालत में इन सभी मामलों को आपसी सहमति के आधार पर सुलझाने का प्रयास किया गया।


3810 मामलों का सफल निपटारा

लोक अदालत के दौरान बड़ी संख्या में मामलों का समाधान हुआ। उन्होंने बताया कि कुल 3810 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।

इनमें

  • 3724 न्यायालयों में लंबित मामलों का समाधान हुआ

  • जबकि 86 प्री-लिटिगेशन मामलों का भी आपसी सहमति से निपटारा किया गया।

इस प्रकार लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में विवादों को अदालत के बाहर ही सुलझाने में सफलता मिली।


4.69 करोड़ रुपये से जुड़े मामलों का समाधान

लोक अदालत के दौरान आर्थिक मामलों से जुड़े विवादों का भी निपटारा किया गया। अध्यक्ष ने बताया कि इस लोक अदालत में 4 करोड़ 69 लाख 49 हजार 671 रुपये से संबंधित मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में विभिन्न प्रकार के वित्तीय विवाद, बैंक ऋण, बिजली-पानी बिल, मोटर वाहन दुर्घटना दावे, पारिवारिक विवाद और अन्य दीवानी मामलों का समाधान शामिल रहा।


न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं का सहयोग

लोक अदालत के सफल आयोजन में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न अदालतों में स्थापित लोक अदालत बेंचों के माध्यम से मामलों की सुनवाई की गई और दोनों पक्षों को आपसी सहमति से समाधान निकालने के लिए प्रेरित किया गया। इस प्रक्रिया में अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई और पक्षकारों को समझौते के लिए प्रेरित किया।


समय और धन की बचत

जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योत्सना सुमन्त डढवाल ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से विवादों का समाधान होने से लोगों का समय और धन दोनों बचते हैं। सामान्य अदालतों में मामलों के निपटारे में लंबा समय लग सकता है, जबकि लोक अदालत में पक्षकारों की सहमति से मामले जल्दी निपट जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल लोगों को राहत मिलती है बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है।


आमजन से लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील

उन्होंने जिला के लोगों से अपील की कि वे भविष्य में भी लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।  लोक अदालत एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें दोनों पक्षों की सहमति से विवादों का समाधान किया जाता है और इसका निर्णय अंतिम होता है। इससे लोगों को न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल और सुलभ बनती है।


न्यायिक व्यवस्था को मिलती है मजबूती

लोक अदालत जैसे आयोजनों के माध्यम से न्यायिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। इनके जरिए छोटे-बड़े विवादों का समाधान शीघ्र हो जाता है और न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम करने में मदद मिलती है। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर आयोजित की जाने वाली ऐसी पहलें आम जनता को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जाती हैं।