त्रियुंड शुल्क व निजीकरण पर नैंसी अटल का विरोध

rakesh nandan

06/04/2026

हिमाचल प्रदेश में पर्यटन और प्राकृतिक स्थलों के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी प्रदेश मंत्री Nancy Atal ने कांगड़ा के प्रसिद्ध Triund Trek पर एंट्री शुल्क और कैंपिंग शुल्क लागू करने तथा इसके प्रबंधन को निजी हाथों में सौंपने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।

⚠️ “जनविरोधी और दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय”

नैंसी अटल ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि पूरी तरह जनविरोधी भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर प्रदेश सरकार वन मित्रों की भर्ती के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक धरोहरों को निजी कंपनियों के हवाले कर रही है, जो नीति में स्पष्ट विरोधाभास दर्शाता है।

💸 शुल्क से बढ़ेगा आर्थिक बोझ

उन्होंने कहा कि त्रियुंड ट्रैक पर ₹100 एंट्री शुल्क और ₹275 प्रतिदिन टेंट शुल्क लगाना आम छात्रों, युवाओं और मध्यमवर्गीय पर्यटकों के लिए अनावश्यक आर्थिक बोझ है।

उनके अनुसार, हिमाचल के पहाड़, जंगल और प्राकृतिक स्थल किसी निजी कंपनी की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि यह प्रदेश की जनता की साझा धरोहर हैं।

🌿 पर्यावरण पर खतरे की आशंका

नैंसी अटल ने यह भी कहा कि निजीकरण के चलते पर्यावरण संरक्षण के बजाय मुनाफाखोरी को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे त्रियुंड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अति-पर्यटन, कचरे की समस्या और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे क्षेत्रों का संतुलित और जिम्मेदार प्रबंधन नहीं किया गया, तो इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है।

🚫 पहुंच पर असर की चिंता

उन्होंने एंट्री समय को सीमित करने और नियंत्रण बढ़ाने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, इससे युवाओं और पर्यटकों की प्राकृतिक स्थलों तक सहज पहुंच बाधित होगी, जो पर्यटन की भावना के विपरीत है।

📢 सरकार से मांग

नैंसी अटल ने प्रदेश सरकार से मांग की कि:

  • त्रियुंड ट्रैक पर लगाए गए शुल्क को तुरंत वापस लिया जाए
  • ट्रैक का प्रबंधन पुनः सरकारी नियंत्रण में लाया जाए
  • स्थानीय युवाओं और वन मित्रों को प्राथमिकता दी जाए
  • पारदर्शी और जनहितैषी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए

⚔️ आंदोलन की चेतावनी

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेशभर में इस नीति के खिलाफ आंदोलन करने को बाध्य होगी।

🔚 निष्कर्ष

त्रियुंड ट्रैक पर शुल्क और निजीकरण को लेकर उठे इस विरोध ने हिमाचल में पर्यटन नीति और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस निर्णय में कोई बदलाव किया जाता है।