जिला बिलासपुर का ऐतिहासिक नलवाड़ी मेला इस वर्ष एक नई और अनूठी परंपरा की शुरुआत का साक्षी बनने जा रहा है। वर्ष 2026 के मेले में पहली बार गोविंद सागर झील के तट पर बनारस की तर्ज पर भव्य “सतलुज महाआरती” का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन ने इस विशेष आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं और इसे नलवाड़ी मेले के प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक आयोजन 17 मार्च को सायं 5:00 बजे लुहणू घाट पर आयोजित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु और पर्यटक आध्यात्मिक वातावरण में इस भव्य कार्यक्रम का साक्षात्कार कर सकेंगे।
लुहणू घाट पर होगा आयोजन
सतलुज महाआरती का आयोजन लुहणू घाट पर किया जाएगा, जो गोविंद सागर झील के किनारे स्थित एक प्रमुख स्थल है। इस विशेष आयोजन के लिए उपायुक्त राहुल कुमार ने अधिकारियों की टीम के साथ कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोजन स्थल पर सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं, ताकि कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जा सके।
बनारस की तर्ज पर होगी महाआरती
सतलुज महाआरती को पारंपरिक और आध्यात्मिक गरिमा के साथ आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ काशी से आमंत्रित प्रसिद्ध पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ आरती संपन्न करवाई जाएगी।
महाआरती के दौरान गोविंद सागर झील के तट को—
रंग-बिरंगी रोशनी
दीपों की श्रृंखला
विशेष सजावट
से अलंकृत किया जाएगा।
इससे पूरा वातावरण अत्यंत दिव्य और आध्यात्मिक दिखाई देगा।
भजन संध्या भी होगी आयोजित
सतलुज महाआरती के साथ ही कार्यक्रम में भक्ति और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण भजन संध्या का भी आयोजन किया जाएगा। इस दौरान हिमाचल प्रदेश के सुप्रसिद्ध भजन गायक अभिषेक सोनी अपनी मधुर प्रस्तुतियों के माध्यम से भक्तिमय माहौल तैयार करेंगे। भजन संध्या के दौरान श्रद्धालु और दर्शक भक्ति संगीत का आनंद लेते हुए महाआरती के दिव्य वातावरण का अनुभव कर सकेंगे।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि सतलुज महाआरती का आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य बिलासपुर की पहचान को पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में मजबूत करना भी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह एक आकर्षक कार्यक्रम बनेगा।
नलवाड़ी मेले की सांस्कृतिक पहचान
उन्होंने कहा कि नलवाड़ी मेला जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और इसमें इस प्रकार के नए और आकर्षक आयोजनों को शामिल करने से मेले की भव्यता और लोकप्रियता और बढ़ेगी। नलवाड़ी मेला हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आकर्षित करता है। इस बार सतलुज महाआरती के आयोजन से मेले की पहचान को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
लोगों से भाग लेने की अपील
उपायुक्त राहुल कुमार ने जिले के सभी नागरिकों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा बल्कि बिलासपुर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा। सतलुज महाआरती के माध्यम से जिला प्रशासन एक नई परंपरा की शुरुआत कर रहा है, जो आने वाले वर्षों में नलवाड़ी मेले की प्रमुख पहचान बन सकती है।