हिमाचल प्रदेश के राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले में इस बार स्थानीय स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। मेले में लगे विभिन्न स्टॉल्स के बीच झंडुता क्षेत्र के “ओम नमः शिवाय स्वयं सहायता समूह” द्वारा लगाया गया स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टॉल पर पारंपरिक और घर के बने व्यंजनों की खुशबू दूर से ही लोगों को अपनी ओर खींच रही है।
इस स्टॉल पर मिलने वाले व्यंजनों में हिमाचली संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है। समूह की महिलाएं चाय, सिड्डू, कचैरी, सीरा, सेवइयां और घर का बना हुआ आचार तैयार कर बेच रही हैं। इन पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद मेले में आने वाले लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए पर्यटक भी इन व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं और इनकी जमकर सराहना कर रहे हैं।
स्टॉल को झंडुता गांव की चार-पांच महिलाएं मिलकर चला रही हैं। इनमें डिंपल सोनी, परमिला देवी (प्रधान) और सपना देवी प्रमुख रूप से शामिल हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन महिलाओं ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर इस स्टॉल को सफल बनाया है। उनका कहना है कि ऐसे मेलों में भाग लेने से उन्हें न केवल आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है, बल्कि समाज में अपनी पहचान बनाने का भी अवसर मिलता है।

महिलाओं ने बताया कि वे सभी व्यंजन घर पर पारंपरिक तरीके से तैयार करती हैं, जिससे उनका स्वाद और गुणवत्ता दोनों बरकरार रहती है। यही कारण है कि मेले में आने वाले लोग बार-बार उनके स्टॉल पर पहुंच रहे हैं। कई लोग तो इन व्यंजनों को पैक करवाकर अपने साथ भी ले जा रहे हैं।
इस पहल के माध्यम से यह समूह न केवल अपनी आय बढ़ा रहा है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। स्वयं सहायता समूहों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना है, और यह स्टॉल उसी दिशा में एक सफल उदाहरण के रूप में सामने आया है।
नलवाड़ी मेला, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के लिए जाना जाता है, इस तरह के प्रयासों से और भी समृद्ध होता जा रहा है। ऐसे स्टॉल्स न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों को भी हिमाचल की पारंपरिक जीवनशैली से रूबरू करवाते हैं।
यह स्टॉल महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। जहां एक ओर लोग स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह पहल महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की कहानी भी बयां कर रही है।

अंत में कहा जा सकता है कि नलवाड़ी मेले में स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक रूप से भी यह एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। इस तरह की पहलें भविष्य में और अधिक महिलाओं को आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेंगी।