जिला बिलासपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक 137 वर्ष पुराने राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला-2026 का भव्य शुभारम्भ हो गया है। इस अवसर पर नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने खूंटी गाड़ कर मेले का विधिवत उद्घाटन किया।
शुभारम्भ समारोह से पहले लक्ष्मी नारायण मंदिर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसकी अगुवाई स्वयं मंत्री राजेश धर्माणी ने की। यह शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई लुहणू मैदान पहुंची, जहां मेले का मुख्य आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान लोक वाद्य यंत्रों और पारंपरिक परिधानों से सजी झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया।
लुहणू मैदान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राजेश धर्माणी ने कहलूरी बोली में लोगों से संवाद करते हुए कहा कि नलवाड़ी मेला बिलासपुर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस मेले का इतिहास लगभग 137 वर्ष पुराना है और इसकी शुरुआत वर्ष 1889 में सांडू मैदान से हुई थी, जो अब लुहणू मैदान में आयोजित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। पहले जहां यह मेला पशुधन की खरीद-फरोख्त और ग्रामीण उत्पादों के आदान-प्रदान का केंद्र था, वहीं आज यह सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का एक बड़ा मंच बन चुका है।
मंत्री ने बताया कि पारंपरिक कला और शिल्प को संरक्षित करने के लिए घुमारवीं में कौशल विकास केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जहां पारंपरिक शिल्पकारों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़ा जाएगा। इससे युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
उन्होंने गोविंद सागर झील में जलक्रीड़ा गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात भी कही। अक्टूबर 2025 में आयोजित “जल तरंग जोश महोत्सव” को उन्होंने एक सफल पहल बताया, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 51 रुपए और भैंस के दूध का 61 रुपए निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गेहूं 60 रुपए, मक्की 40 रुपए और हल्दी 90 रुपए प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य तय किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष जिला बिलासपुर में 100 क्विंटल कच्ची हल्दी की खरीद की गई, जिससे किसानों को लाभ मिला।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी सरकार प्रयासरत है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 151 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्धता दी गई है, जिनमें बिलासपुर के 11 स्कूल शामिल हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में नागरिक अस्पतालों में न्यूनतम छह विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश सरकार 21 मार्च को बजट प्रस्तुत करने जा रही है, जिसमें आम जनता के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने भाखड़ा बांध निर्माण में बिलासपुर और ऊना के लोगों के योगदान को भी याद किया और कहा कि भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड में प्रदेश का लगभग 4500 करोड़ रुपए लंबित है। इसके अलावा शानन जल विद्युत परियोजना की लीज अवधि पूरी होने के बावजूद इस पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
इस वर्ष मेले को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कई नए कार्यक्रम जोड़े गए हैं। इनमें सतलुज महाआरती, नाट्य उत्सव, 19 मार्च को साहित्य उत्सव और “वॉइस ऑफ बिलासपुर” प्रतियोगिता प्रमुख हैं। इस प्रतियोगिता में विजेता को 1 लाख रुपए, द्वितीय स्थान पर 50 हजार रुपए और तृतीय स्थान पर 25 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त “मिस बिलासपुर 2026” प्रतियोगिता और कहलूर उत्सव के तहत स्थानीय कलाकारों द्वारा नाटी, लोक नृत्य और लोक संगीत की प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी, जो मेले का मुख्य आकर्षण रहेंगी।
मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त राहुल कुमार ने मेले की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह आयोजन स्थानीय व्यापार, पर्यटन और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। यह मेला आने वाले दिनों में बिलासपुर जिले के सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।