राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला-2026 के अंतर्गत बहुउद्देशीय सांस्कृतिक भवन में आयोजित साहित्य उत्सव 2026 ने साहित्य, संस्कृति और विचारों का एक जीवंत संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ राहुल कुमार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में प्रसिद्ध युवा साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल को सुनने के लिए भारी संख्या में साहित्य प्रेमी पहुंचे, जिससे पूरा सभागार खचाखच भरा नजर आया।
साहित्य के मायने और युवाओं की भूमिका
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में नीलोत्पल मृणाल ने “मेरे लिए साहित्य के मायने” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की आत्मा है, जो समय-समय पर समाज को दिशा देने का कार्य करता है। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य को आकार देने वाला एक सशक्त माध्यम है। उनके विचारों ने उपस्थित युवाओं को गहराई से प्रभावित किया।
साहित्यिक यात्रा और अनुभव साझा
नीलोत्पल मृणाल ने अपनी साहित्यिक यात्रा का उल्लेख करते हुए अपनी चर्चित कृतियों और लेखन अनुभवों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उनकी रचनाएं आम जनजीवन, संघर्ष, सामाजिक असमानताओं और बदलते परिवेश से प्रेरित होती हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी कविताओं का सजीव पाठ किया, जिसने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति के दौरान बार-बार तालियों की गूंज सुनाई दी, जिससे कार्यक्रम का माहौल और अधिक भावपूर्ण बन गया।
स्थानीय साहित्यकारों की सहभागिता
विशेष साहित्यिक सत्र में जिला के प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने भी भाग लिया और साहित्य के विभिन्न आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर शीला सिंह, जीत राम सुमन, डॉ. लेखराम शर्मा, रवीन्द्र नाथ भट्टा और डॉ. रवीन्द्र ठाकुर ने अपने विचार साझा किए। इन सभी वक्ताओं ने साहित्य की वर्तमान स्थिति, उसकी उपयोगिता और समाज में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
जागरूकता और सामाजिक विषयों पर चर्चा
कार्यक्रम के अंतर्गत एक जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा वर्कर्स ने भाग लिया। इस सत्र में स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की गई, जिससे कार्यक्रम को एक व्यापक सामाजिक आयाम मिला।
बहुभाषी कवि सम्मेलन बना आकर्षण
साहित्य उत्सव के दौरान आयोजित बहुभाषी कवि सम्मेलन भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें जिला बिलासपुर के विभिन्न बोलियों के कवियों और स्थानीय रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय भाषा, संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली, जिसने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
प्रशासन का उद्देश्य
उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य कला और संस्कृति से जुड़े सभी प्रतिभाओं को नलवाड़ी मेले के मंच से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से इस वर्ष नाट्य उत्सव और साहित्य उत्सव का आयोजन किया गया है, ताकि स्थानीय कलाकारों और साहित्यकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके।
जनसहभागिता का उत्सव
उन्होंने कहा कि मेले को अधिक भव्य और आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे यह आयोजन जनसहभागिता का उत्सव बन सके। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त ओमकांत ठाकुर, सहायक आयुक्त राजकुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
नलवाड़ी मेला-2026 में आयोजित साहित्य उत्सव ने न केवल साहित्य प्रेमियों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि युवाओं को हिंदी साहित्य की ओर प्रेरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा। 