जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) नाहन में आयोजित पांच दिवसीय इन-सर्विस इक्विटेबल एंड इंक्लूसिव एजुकेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम (निष्ठा) का 13 मार्च 2026 को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों, पद्धतियों और व्यवहारिक पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित करना था, ताकि विद्यालयों में सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाई जा सके। समापन समारोह के अवसर पर जिला शिक्षा उपनिदेशक (उच्च शिक्षा), गुणवत्ता एवं जिला परियोजना अधिकारी विजय राघव तथा जिला शिक्षा उपनिदेशक (प्रारंभिक शिक्षा) एवं डाइट नाहन के प्रधानाचार्य राजीव ठाकुर ने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले अध्यापकों को प्रमाण पत्र वितरित किए।
लगभग 140 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए जिला इंक्लूसिव एजुकेशन कोऑर्डिनेटर शिवानी थापा और डॉ. शैली गोपाल ने बताया कि इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न शिक्षा खंडों से आए लगभग 140 अध्यापकों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को समावेशी शिक्षा की अवधारणा, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उनकी शिक्षा में सहयोग और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें शिक्षकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। इन ऑनलाइन सत्रों का संचालन
SCERT Solan
NCERT
GRID Chandigarh
के विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
इन सत्रों में शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों, समावेशी कक्षा प्रबंधन और बच्चों की विविध आवश्यकताओं को समझने के तरीकों के बारे में बताया गया।
ऑफलाइन सत्रों में दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत ऑफलाइन सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इन सत्रों का संचालन
Aastha Special School
जिले के मास्टर ट्रेनरों
द्वारा किया गया।
इन सत्रों में शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ काम करने की तकनीकों, शिक्षण विधियों और कक्षा में समावेशी वातावरण तैयार करने के बारे में जानकारी दी गई।
समावेशी शिक्षा का महत्व
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि समावेशी शिक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चे, चाहे उनकी शारीरिक, मानसिक या सामाजिक परिस्थितियां कैसी भी हों, उन्हें समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके। इसके लिए शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार करते हैं जहां हर बच्चा सहज और आत्मविश्वास के साथ सीख सके।
शिक्षकों को मिला नया दृष्टिकोण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों और समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों के बारे में जानकारी मिली। शिक्षकों ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें कक्षा में विविध पृष्ठभूमि और आवश्यकताओं वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए बेहतर समझ और दृष्टिकोण प्राप्त हुआ है।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में पहल
डाइट नाहन द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता को मजबूत किया जाता है, जिससे वे विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर शिक्षण प्रदान कर सकें। समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि प्रत्येक बच्चा शिक्षा के अधिकार का लाभ समान रूप से प्राप्त कर सके।