अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के अवसर पर 03 दिसंबर 2025 को नादौन में नाबार्ड द्वारा एक महत्वपूर्ण रणनीतिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में ग्रामीण सहकारिता संरचना को सुदृढ़ बनाने, डेयरी सहकारी समितियों की विकासात्मक—वित्तीय आवश्यकताओं को समझने तथा उन्हें औपचारिक सहकारी बैंकिंग ढांचे से जोड़ने पर विशेष चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य एजेंडा था—“सहकारिताओं के बीच सहयोग”, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि विभिन्न सहकारी संस्थाएं मिलकर कैसे एक आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था तैयार कर सकती हैं।
✔ डेयरी सहकारी समितियों को व्यापार विस्तार की सलाह
पशुपालन विभाग हमीरपुर के उप निदेशक सतीश कपूर ने कहा कि समितियों को सिर्फ दूध संग्रह तक सीमित न रहकर,
मूल्य वर्धित दूध उत्पाद,
पशु आहार आपूर्ति,
किसानों के लिए वन-स्टॉप समाधान केंद्र,
ग्राहक सेवा केंद्र
जैसी विविध सेवाएं शुरू करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह कदम समितियों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाएगा।
✔ मिल्कफेड की भूमिका और MSP जानकारी
मिल्कफेड जालारी प्लांट की दूध खरीद सहायक सुनीता ने राज्य सरकार द्वारा निर्धारित MSP, दूध संग्रह वैनों की व्यवस्था और किसानों से दूध खरीद की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी।
✔ नाबार्ड का दृष्टिकोण: सहकारी बैंकिंग से जोड़ना आवश्यक
डीडीएम नाबार्ड हमीरपुर नरेश कुमार ने कहा कि डेयरी समितियों को औपचारिक सहकारी बैंकिंग से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने समितियों और सदस्यों से आग्रह किया कि वे सक्रिय बैंक खाते खोलें ताकि डिजिटल लेनदेन बढ़ सके और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि डेयरी समितियों को “बैंक मित्र” (BC Agent) बनाया जाए ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में—
माइक्रो-एटीएम,
RuPay KCC,
बैंकिंग सेवाएं
किसानों के घर-द्वार पर उपलब्ध करा सकें।
✔ KCC और वित्तीय सहायता पर विस्तृत चर्चा
शिविर में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और डेयरी किसानों के लिए कम ब्याज वाली कार्यशील पूंजी योजनाओं पर भी चर्चा की गई, जो पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए अत्यंत सहायक हैं।
✔ डगवार दूध संयंत्र खोलता है विशाल संभावनाएं
कांगड़ा जिले के डगवार दुग्ध संयंत्र की रणनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, वक्ताओं ने इस क्षेत्र में विशाल डेयरी क्षमता पर प्रकाश डाला।
डेयरी समितियों से आग्रह किया गया कि वे दूध खरीद बढ़ाएँ और इस संयंत्र के माध्यम से किसानों को बेहतर पारिश्रमिक सुनिश्चित करें।
नाबार्ड ने कहा कि हमीरपुर की डेयरी समितियों को सिर्फ संग्रह केंद्र नहीं, बल्कि मजबूत वित्तीय और व्यावसायिक इकाइयों के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज किया जाएगा।
✔ शिविर में समितियों की नई प्रतिबद्धताएँ
कार्यक्रम के अंत में सभी भाग लेने वाली समितियों ने निम्न संकल्प लिए—
सदस्यता वृद्धि,
संचालन का आधुनिकीकरण,
वित्तीय समावेशन में सक्रिय भूमिका,
सहकारी बैंकिंग से जुड़ाव।
शिविर में KCCB के शाखा प्रबंधक, सहकारी समिति विभाग के ब्लॉक निरीक्षक, डेयरी सहकारी समितियों के अध्यक्ष, सचिव और सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।