हिमाचल प्रदेश सरकार के उद्योग विभाग द्वारा राइजिंग एंड एक्सीलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस प्रोग्राम के अंतर्गत आज जिला बिलासपुर के ग्वालथाई औद्योगिक क्षेत्र स्थित होटल हिल व्यू-कम-रेस्टोरेंट में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र बिलासपुर Madhu Sharma ने की। इस अवसर पर 40 से अधिक उद्यमियों ने भाग लेकर डिजिटल तकनीकों और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यशाला का उद्देश्य
मधु शर्मा ने अपने संबोधन में बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ावा देना और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीकी उन्नयन और सरकारी खरीद प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय भागीदारी एमएसएमई इकाइयों के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। सरकारी खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाकर स्थानीय उद्यमियों को बड़े बाजार तक पहुंच प्रदान करना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।
स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0
कार्यशाला के स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग सत्र में इंडस्ट्री 4.0 के प्रमुख पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान निम्न विषयों पर विशेष जोर दिया गया:
ऑटोमेशन और डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग
डेटा-ड्रिवन डिसीजन मेकिंग
प्रोडक्टिविटी में सुधार
क्वालिटी एन्हांसमेंट
कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन
विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उत्पादन प्रक्रिया अधिक सटीक, तेज और लागत प्रभावी बन सकती है। डिजिटल उपकरणों और सॉफ्टवेयर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से उत्पादन की गुणवत्ता और दक्षता दोनों में सुधार संभव है।
GeM और CPP पोर्टल पर जागरूकता
कार्यशाला के दूसरे चरण में GeM (Government e-Marketplace) और Central Public Procurement (CPP) पोर्टल के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
इस सत्र में निम्न बिंदुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया:
रजिस्ट्रेशन और ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया
बिडिंग प्रक्रिया की जानकारी
कंप्लायंस आवश्यकताएं
एमएसएमई फ्रेंडली प्रावधान
पेमेंट मैकेनिज्म
सरकारी खरीद के अवसर
उद्यमियों को बताया गया कि GeM और CPP जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से वे सीधे सरकारी विभागों को अपने उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और भुगतान प्रक्रिया भी अधिक सुव्यवस्थित होती है।
उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी
कार्यशाला में 40 से अधिक एंटरप्रेन्योर्स की भागीदारी रही। प्रतिभागियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के उपयोग, सरकारी निविदाओं में भाग लेने की प्रक्रिया और इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने उनके सवालों का समाधान करते हुए उन्हें व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार तकनीकी उन्नयन से वे अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस का महत्व
इस अवसर पर सिंगल विंडो क्लीयरेंस ऑफिस के सदस्य सचिव Vinay Verma भी उपस्थित रहे। उन्होंने उद्यमियों को विभिन्न औद्योगिक अनुमतियों और स्वीकृतियों को सरल एवं समयबद्ध तरीके से प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो सिस्टम का उद्देश्य उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, ताकि उद्यमियों को अनावश्यक जटिलताओं का सामना न करना पड़े।
डिजिटल बदलाव से आर्थिक सशक्तिकरण
कार्यशाला के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि डिजिटल तकनीकों को अपनाना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। सरकारी प्लेटफॉर्म्स पर पंजीकरण और सक्रिय भागीदारी से स्थानीय एमएसएमई इकाइयों को राष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकते हैं। यह पहल न केवल उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
निष्कर्ष
बिलासपुर में आयोजित यह कार्यशाला एमएसएमई सेक्टर को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, GeM और CPP पोर्टल्स की जानकारी से उद्यमियों को अपने व्यवसाय को आधुनिक तकनीक और सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार की पहलें स्थानीय उद्योगों को मजबूत कर आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होंगी।