हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई बढ़ोतरी को किसानों और पशुपालकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इस निर्णय से उनकी आय में सुधार होगा और पशुपालन को लंबे समय तक जारी रखना आसान बनेगा।
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने बजट में गाय और भैंस के दूध के MSP में वृद्धि की घोषणा की है। इसके अनुसार गाय के दूध का मूल्य ₹51 से बढ़ाकर ₹61 प्रति लीटर और भैंस के दूध का MSP ₹61 से बढ़ाकर ₹71 प्रति लीटर कर दिया गया है। प्रति लीटर ₹10 की यह वृद्धि छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस फैसले का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। विशेष रूप से उन परिवारों के लिए, जिनकी आय का मुख्य स्रोत डेयरी गतिविधियां हैं, यह बढ़ोतरी आर्थिक मजबूती का आधार बन सकती है।
Una जिले में इस निर्णय को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। ठाकरां गांव के किसान जरनैल सिंह का कहना है कि दूध के दाम बढ़ने से पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी मासिक आय में सुधार होगा। उन्होंने इसे सरकार का सराहनीय कदम बताया।
इसी तरह अम्ब तहसील के चुरूड़ू गांव के विजय कुमार का मानना है कि यदि उत्पाद का उचित मूल्य मिले, तो युवाओं का रुझान भी डेयरी क्षेत्र की ओर बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि पशुपालन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार का मजबूत विकल्प बन सकता है।
जिले में बड़ी संख्या में परिवार डेयरी से जुड़े हुए हैं। ऐसे में दूध के दाम बढ़ने से गांवों में नकदी प्रवाह बढ़ेगा, जिससे स्थानीय बाजारों में भी मांग बढ़ने की संभावना है। इसका सकारात्मक प्रभाव अन्य छोटे व्यवसायों पर भी पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में यह वृद्धि केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संपूर्ण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इस फैसले से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ेगी।
पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा डेयरी अवसंरचना को मजबूत करने और सहकारी ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। दूध के MSP में वृद्धि को इन्हीं प्रयासों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
इस निर्णय से यह भी उम्मीद की जा रही है कि पशुपालक बेहतर गुणवत्ता का दूध उत्पादन करने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे डेयरी उद्योग का समग्र विकास होगा।
कुल मिलाकर, दूध के MSP में बढ़ोतरी को हिमाचल प्रदेश में किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने, रोजगार के अवसर सृजित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
