‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान के आवेदन 31 मार्च तक

rakesh nandan

06/02/2026

अदालतों में लंबित मामलों को मध्यस्थता, सुलह एवं आपसी सहमति से निपटाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान के तहत लाभ उठाने के लिए 31 मार्च तक संबंधित अदालतों में आवेदन किया जा सकता है। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अदालतों में लंबित मामलों का निपटारा आपसी सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से किया जाना एक सरल, त्वरित और प्रभावी विकल्प है। इससे न केवल दोनों पक्षों के समय और धन की बचत होती है, बल्कि आपसी सौहार्द और सामाजिक संबंध भी बने रहते हैं।


🟦 लंबित मामलों के लिए प्रभावी विकल्प

उन्होंने कहा कि न्यायालयों में कई मामले वर्षों तक लंबित रहते हैं, जिससे पक्षकारों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए मध्यस्थता, सुलह और आपसी सहमति एक बेहतर माध्यम है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा देशभर में ‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’ अभियान आरंभ किया गया है।


🟦 इन मामलों का किया जा सकता है निपटारा

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत निम्नलिखित मामलों का निपटारा मध्यस्थता से किया जा सकता है—

  • वैवाहिक विवाद

  • चैक बाउंस के मामले

  • सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित केस

  • क्रिमिनल कंपाउंडेबल अपराध

  • बीमा से जुड़े विवाद

  • भूमि अधिग्रहण (एलए) से संबंधित मामले

उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा


🟦 31 मार्च तक करें आवेदन

यदि कोई पक्ष अपने मामले का निपटारा इस अभियान के अंतर्गत करवाना चाहता है, तो वह 31 मार्च तक संबंधित अदालत में आवेदन कर सकता है। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने आमजन से अपील की है कि वे इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर न्यायिक प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाएं।