जिला सिरमौर में मानगढ़–चनाहलग से नाहन जाने वाली एकमात्र बस सेवा को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बस के पट्टे (स्प्रिंग) टूटे होने के बावजूद उसे सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों और यात्रियों के अनुसार, बस की हालत काफी खराब थी और उसमें तकनीकी खराबी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। इसके बावजूद बस को नियमित रूप से चलाया जा रहा था, जो सीधे तौर पर यात्रियों की जान को जोखिम में डालने जैसा है।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब संबंधित क्षेत्र के रीजनल मैनेजर (RM) द्वारा चालक और परिचालक को बस को लिंक रोड पर ले जाने के निर्देश दिए गए। मौके पर मौजूद सवारियों के अनुसार, ड्राइवर और कंडक्टर ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बस को मुख्य मार्ग से धीरे-धीरे मुख्यालय तक ले जाने का सुझाव दिया था, ताकि यात्रियों को सुरक्षित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।
लेकिन अधिकारियों के दबाव के चलते कर्मचारियों की बात को नजरअंदाज कर दिया गया। परिणामस्वरूप यात्रियों को बीच रास्ते में, शिरला के पास बस से उतरना पड़ा। इस दौरान यात्रियों को न केवल भारी असुविधा का सामना करना पड़ा, बल्कि उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई।
यह मामला केवल एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में परिवहन सेवाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले ही घाटे का हवाला देकर टोन्डा रूट की बस सेवा बंद कर दी गई है, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब मानगढ़–चनाहलग रूट की एकमात्र बस सेवा भी इसी तरह की लापरवाही का शिकार हो रही है।

इस बस सेवा पर लगभग 8 से 9 पंचायतों के लोग निर्भर हैं, जो रोजाना नाहन और अन्य स्थानों तक आवागमन के लिए इसका उपयोग करते हैं। बस की खराब स्थिति के कारण लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनके दैनिक जीवन और कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी, जो स्वयं इसी क्षेत्र से संबंध रखते हैं, क्षेत्र की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
इस मामले को लेकर लोगों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा है कि खराब बस को तुरंत हटाकर उसकी जगह सुरक्षित और सुचारू बस सेवा उपलब्ध करवाई जाए। इसके अलावा बस को मुख्य मार्ग से ही नियमित रूप से चलाया जाए और ड्राइवर-कंडक्टर पर किसी प्रकार का दबाव न बनाया जाए।
लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, यह मामला न केवल परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सार्वजनिक सेवाओं में सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।