विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता और जांच अभियान की शुरुआत की गई। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपाली शर्मा की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें टीबी उन्मूलन के लिए कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की गईं।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय अस्पताल मंडी से नर्सिंग प्रशिक्षुओं द्वारा एक जागरूकता रैली निकाली गई, जिसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही “निःक्षय वाहन रैली” भी आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करना और जांच के लिए प्रेरित करना था।
इस मौके पर 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान का भी शुभारंभ किया गया। डॉ. दीपाली शर्मा ने बताया कि इस अभियान के तहत न केवल लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया जाएगा, बल्कि संभावित रोगियों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार भी उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि जिला मंडी में 835 उच्च जोखिम वाले गांवों की पहचान की गई है, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीमें जाकर विशेष जांच अभियान चलाएंगी। इन गांवों में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से लोगों की जांच की जाएगी, जिससे टीबी के मरीजों की शीघ्र पहचान संभव हो सके।
इसके अलावा, अन्य संभावित लक्षण वाले व्यक्तियों की भी जांच की जाएगी, ताकि कोई भी मरीज उपचार से वंचित न रह जाए। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि टीबी के मामलों को शुरुआती स्तर पर ही पहचानकर उन्हें पूर्ण रूप से ठीक किया जाए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि टीबी एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन इसका उपचार पूरी तरह संभव है। सरकार द्वारा सभी टीबी रोगियों को सरकारी अस्पतालों में निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही मरीजों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, ताकि वे उपचार के दौरान किसी आर्थिक कठिनाई का सामना न करें।
इसके अतिरिक्त, “निःक्षय मित्र” योजना के तहत टीबी मरीजों को अतिरिक्त पोषण किट भी उपलब्ध करवाई जाती है। यह पोषण किट मरीजों के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और उन्हें जल्दी स्वस्थ होने में मदद करती है।
कार्यक्रम के दौरान जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. अरिंदम राय ने बताया कि इस अवसर पर रचनात्मक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया गया। “रेड ऐरो प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने टीबी जागरूकता पर आधारित रील्स तैयार कीं।
इस प्रतियोगिता में राजकीय नर्सिंग स्कूल मंडी ने प्रथम स्थान हासिल किया और उसे ₹3000 का नकद पुरस्कार दिया गया। वहीं अरोमा नर्सिंग स्कूल सुंदरनगर ने दूसरा स्थान प्राप्त किया, जिसे ₹2000 का पुरस्कार मिला, जबकि हिमालयन नर्सिंग कॉलेज जोगिंदर नगर तीसरे स्थान पर रहा और उसे ₹1000 से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अतुल गुप्ता, सलाहकार शेयर इंडिया डॉ. सुशील चन्द्र, नर्सिंग प्रिंसिपल ऊषा चौहान सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अभियान का उद्देश्य न केवल टीबी के मरीजों की पहचान करना है, बल्कि समाज में इस बीमारी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना भी है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच करवाएं और उपचार में लापरवाही न बरतें।
अंत में अधिकारियों ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही टीबी मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और इस दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।