मंडी में स्टार्टअप इकोसिस्टम पर कार्यशाला आयोजित

rakesh nandan

23/03/2026

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला उद्योग केंद्र (DIC) मंडी में स्टार्टअप इकोसिस्टम पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्टार्टअप्स से जुड़े विभिन्न विभागों के सामने आने वाली समस्याओं की पहचान करना, उन्हें संकलित करना और उद्योग विभाग के माध्यम से उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना था।

कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप्स को अपने नवाचार प्रस्तुत करने और विभिन्न विभागों के साथ संभावित सहयोग के अवसर तलाशने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया गया। इससे न केवल स्टार्टअप्स को अपनी तकनीक और विचारों को साझा करने का अवसर मिला, बल्कि सरकारी विभागों को भी उनकी जरूरतों और चुनौतियों को समझने का मौका मिला।

कार्यशाला में कई नवाचारों ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। आईओटीएस (IoTS) द्वारा भूस्खलन निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली पर प्रस्तुति दी गई, जिसे लूनर टेक्नोलॉजी और आईआईटी मद्रास के सहयोग से विकसित किया गया है। यह प्रणाली विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयोगी है, जहां भूस्खलन एक बड़ी समस्या है। इस तकनीक के माध्यम से आसपास के लोगों और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को समय रहते चेतावनी दी जा सकती है, जिससे जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

इसके अलावा, सुकेई फिल्म्ज़ द्वारा एक अभिनव ओटीटी आधारित एप्लिकेशन प्रस्तुत किया गया, जो वाहनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को उनके आसपास के पर्यटन स्थलों और स्थानीय जानकारी उपलब्ध कराएगा। यह ऐप पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ यात्रियों के अनुभव को भी बेहतर बनाने में मदद करेगा।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत सफल लाभार्थी कंचन शर्मा ने भी अपनी उद्यमिता यात्रा साझा की। उन्होंने कीड़ा जड़ी जैसे औषधीय उत्पादों के उत्पादन में अपने अनुभवों और चुनौतियों के बारे में बताया, जिससे अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिली।

बॉट डिजिट के प्रतिनिधियों प्रियंशु और प्रिक्षित भाटिया ने वेब डिजाइनिंग सेवाओं पर प्रस्तुति दी और डिजिटल क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला। वहीं, क्रिएटिव मैकेनिक्स के शिवांश गुलेरिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के क्षेत्र में अपनी सेवाओं और संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।

इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें अग्रणी बैंक प्रबंधक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, सेरीकल्चर विभाग, हिमक्राफ्ट, बागवानी, पशुपालन, कृषि, खनन और नगर निगम के अधिकारी शामिल थे। इसके अलावा आईआईटी मंडी इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़े स्टार्टअप्स और डीआईसी मंडी के अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

इस प्रकार की कार्यशालाएं स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे स्टार्टअप्स को सरकारी योजनाओं और विभागों के साथ जुड़ने का अवसर मिलता है, वहीं प्रशासन को भी जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में नवाचार आधारित स्टार्टअप्स स्थानीय समस्याओं के समाधान में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भूस्खलन, पर्यटन, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधान राज्य के विकास को नई दिशा दे सकते हैं।

अंत में कहा जा सकता है कि मंडी में आयोजित यह स्टार्टअप कार्यशाला नवाचार, सहयोग और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी।