मंडी में सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती, DC के निर्देश

rakesh nandan

30/03/2026

जिला मंडी में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। उपायुक्त Apurva Devgan की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से संबंधित मामलों तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उन्मूलन पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक पर पूर्णतः रोक सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा किए गए निरीक्षण, चालान, प्लास्टिक जब्ती और कचरा निस्तारण की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और संस्थानों में नियमित निरीक्षण अभियान चलाए जाएं, ताकि प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

उन्होंने प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि कतरित (श्रेडेड) प्लास्टिक का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाए। उन्होंने बताया कि एक किलोमीटर सड़क निर्माण में लगभग 550 किलोग्राम प्लास्टिक का उपयोग किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा।

सेप्टिक टैंक से निकलने वाले अपशिष्ट के निस्तारण को लेकर भी उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सेप्टिक टैंक से निकाले गए मल को केवल अधिकृत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ही डंप किया जाए। खुले में या नालों में इस तरह का अपशिष्ट बहाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने सभी डिस्लजर और ठेकेदारों के लिए नगर निकायों और ब्लॉक कार्यालयों में पंजीकरण अनिवार्य किया। साथ ही एसडीएम और बीडीओ को निर्देश दिए कि वे जल शक्ति विभाग के साथ समन्वय बनाकर यह सुनिश्चित करें कि अपशिष्ट का निस्तारण केवल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाए।

उपायुक्त ने जानकारी दी कि जिले के 426 गांवों को सुरक्षित स्लज निस्तारण के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा गया है। इनमें जोगिन्द्रनगर, मंडी और सुंदरनगर क्षेत्रों के प्लांट शामिल हैं, जहां अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है।

कचरा प्रबंधन को लेकर भी उपायुक्त ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ठोस और तरल कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

उन्होंने नगर परिषद सुंदरनगर में गीले कचरे के निस्तारण के लिए स्थापित मशीनरी के बंद होने पर नाराजगी जताई और इसे तुरंत चालू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

उपायुक्त ने यह भी कहा कि NGT के दिशा-निर्देशों का पालन सभी विभागों के लिए अनिवार्य है। यदि किसी स्तर पर मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु, नगर निगम आयुक्त रोहित राठौर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, मंडी प्रशासन द्वारा उठाए गए ये कदम पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में एक मजबूत पहल हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती और कचरा प्रबंधन में सुधार से जिले में स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।