मंडी शिवरात्रि: 108 देवताओं की देवधुन स्पर्धा

rakesh nandan

19/02/2026

छोटी काशी में देव संस्कृति का उल्लास

Mandi International Shivratri Festival के अंतर्गत आयोजित देवधुन/वाद्ययंत्र एवं देवलु नाटी प्रतियोगिताओं का प्रथम चरण आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। छोटी काशी के नाम से विख्यात Mandi में आयोजित इन प्रतियोगिताओं के दौरान देव समाज और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था का वातावरण देखने को मिला। महोत्सव हिमाचल की समृद्ध देव परंपरा, लोक संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक है।


108 देवताओं ने कराया पंजीकरण

प्रतियोगिता के लिए बीते दिवस से लेकर आज तक कुल 108 देवताओं के बजंत्रियों ने वाद्ययंत्र प्रतियोगिता हेतु पंजीकरण करवाया। वहीं देवलु नाटी प्रतियोगिता के लिए 18 देवताओं के देवलु दलों ने अपना नाम दर्ज कराया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि शिवरात्रि महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा का भी महत्वपूर्ण मंच है, जहां पारंपरिक कलाओं को संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाता है।


83 दलों का प्रभावशाली प्रदर्शन

प्रथम चरण में कुल 83 वाद्ययंत्र दलों ने पारंपरिक वाद्यों के माध्यम से अपनी कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। नगाड़ों की गूंज, करनाल की ऊँची ध्वनि और रणसिंघा की अनुगूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। उत्कृष्ट प्रस्तुति के आधार पर इनमें से 16 वाद्ययंत्र दल दूसरे दौर के लिए चयनित किए गए। देवलु नाटी प्रतियोगिता में 7 देवताओं के देवलु दलों ने भाग लिया। पारंपरिक पोशाक और तालबद्ध नृत्य शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इनमें से 5 देवलु नाटी दल फाइनल चरण के लिए चयनित हुए।


पारंपरिक वाद्ययंत्रों की सांस्कृतिक पहचान

देवधुन प्रतियोगिता में पारंपरिक नगाड़े, करनाल, रणसिंघा और अन्य वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति ने हिमाचल की लोक विरासत को जीवंत कर दिया। देव समाज के बजंत्री दलों ने न केवल संगीत कौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक अनुशासन का भी परिचय दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।


निर्णायक मंडल की भूमिका

प्रतियोगिता के लिए गठित निर्णायक मंडल में मुरारी शर्मा, कृष्णा देवी और उमेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रस्तुति की पारंपरिक शुद्धता, तालमेल, अनुशासन और सांस्कृतिक मानकों के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की। इस अवसर पर सर्व देवता समिति के महासचिव दिनेश शर्मा सहित देव समाज से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


कल होगा फाइनल मुकाबला

महोत्सव के अंतर्गत कल 16 वाद्ययंत्र दलों और 5 देवलु नाटी दलों के बीच दूसरे दौर का फाइनल मुकाबला आयोजित किया जाएगा। विजेताओं को प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाएगा। फाइनल मुकाबले को लेकर प्रतिभागियों और दर्शकों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।


सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

मंडी शिवरात्रि महोत्सव हिमाचल प्रदेश की देव संस्कृति, लोक नृत्य और पारंपरिक संगीत को संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। 108 देवताओं की भागीदारी, 83 दलों का प्रदर्शन, तथा 16 वाद्य और 5 नाटी दलों का फाइनल चयन इस आयोजन की व्यापकता और लोकप्रियता को दर्शाता है। यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का भी सशक्त मंच है।