7 मार्च को मंडी में जन शिकायत समिति बैठक

rakesh nandan

28/02/2026

7 मार्च को विपाशा सदन मंडी में जन शिकायत निवारण समिति की बैठक

डॉ. मदन कुमार, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी, ने जानकारी दी है कि जिला जन शिकायत निवारण समिति की बैठक 7 मार्च को प्रातः 11.00 बजे आयोजित की जाएगी। यह बैठक विपाशा सदन में होगी। उन्होंने बताया कि बैठक की अध्यक्षता राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी करेंगे। इस बैठक में विभिन्न विभागों से संबंधित जन शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और उनके समाधान की दिशा में आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

विभिन्न विभागों की शिकायतों पर होगा विचार

अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने बताया कि समिति की बैठक में राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास सहित अन्य विभागों से जुड़ी जन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा। आम नागरिकों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों का क्रमवार परीक्षण कर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। बैठक का उद्देश्य केवल शिकायतों को सुनना नहीं, बल्कि उनके त्वरित और प्रभावी निवारण की दिशा में ठोस कदम उठाना है। इससे प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित होती है और जनता का विश्वास मजबूत होता है।

विभागों को दिए गए आवश्यक निर्देश

डॉ. मदन कुमार ने बताया कि सभी संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए हैं। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने विभाग से जुड़ी शिकायतों की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट के साथ बैठक में उपस्थित हों। इससे बैठक के दौरान लंबित मामलों पर स्पष्ट चर्चा हो सकेगी और मौके पर ही समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

गैर-सरकारी सदस्यों से सहयोग की अपील

उन्होंने समिति के सभी गैर-सरकारी सदस्यों से आग्रह किया कि वे जन शिकायतों की सूचना समय पर भेजें। समय से प्राप्त शिकायतों को एजेंडा में शामिल कर उनकी सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि जनप्रतिनिधियों और गैर-सरकारी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से बैठक अधिक प्रभावी बनती है। इससे जमीनी स्तर की समस्याएं सीधे समिति के समक्ष रखी जा सकती हैं।

जन शिकायत समिति की भूमिका

जिला जन शिकायत निवारण समिति प्रशासन और आम जनता के बीच सेतु का कार्य करती है। यह मंच नागरिकों को अपनी समस्याएं सीधे उच्च स्तर पर रखने का अवसर प्रदान करता है। ऐसी बैठकों के माध्यम से न केवल लंबित मामलों की समीक्षा होती है, बल्कि भविष्य में शिकायतों की संख्या कम करने के लिए भी रणनीति तैयार की जाती है। समयबद्ध निवारण से प्रशासनिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा मिलता है।