मंडी में अनाथ बच्चों को 21 हजार तक सहायता योजना

rakesh nandan

08/04/2026

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आतंकवादी हिंसा, उग्रवाद या सीमापार गोलीबारी के कारण प्रभावित बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें ऐसे अनाथ और निराश्रित बच्चों की पहचान, सत्यापन और सहायता के लिए योजना पर चर्चा की गई।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों तक सरकारी सहायता पहुंचाना है, जिन्होंने हिंसा या अन्य गंभीर परिस्थितियों में अपने अभिभावकों को खो दिया है। उपायुक्त ने बताया कि समिति पात्र बच्चों के दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन करेगी और निर्धारित प्रारूप में आवेदन तैयार कर राज्य सरकार के गृह विभाग को संस्तुति के साथ भेजेगी।

🔹 कैसे होगी बच्चों की पहचान

प्रशासन द्वारा इस प्रक्रिया को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए कई माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, आशा कार्यकर्ता और स्वयं सहायता समूहों की मदद से पात्र बच्चों की पहचान की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी जरूरतमंद बच्चा इस योजना से वंचित न रह जाए।

यह एक व्यापक और समन्वित प्रयास है, जिसमें विभिन्न विभाग मिलकर काम करेंगे ताकि सही लाभार्थियों तक सहायता पहुंच सके।


🔹 कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता

भारत सरकार द्वारा गठित राष्ट्रीय बाल कोष के तहत पात्र बच्चों को उनकी शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता विभिन्न स्तरों पर इस प्रकार निर्धारित की गई है:

  • कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई, आईटीआई, डिप्लोमा या कंप्यूटर कोर्स के लिए
    👉 ₹15,000 प्रति वर्ष
  • स्नातक या स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए
    👉 ₹18,000 प्रति वर्ष
  • व्यावसायिक (प्रोफेशनल) कोर्स के लिए
    👉 ₹21,000 प्रति वर्ष

यह सहायता बच्चों की पढ़ाई पूरी होने तक या अधिकतम 25 वर्ष की आयु तक दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उनकी शिक्षा में कोई बाधा न आने देना है।


🔹 शिक्षा और भविष्य पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। अनाथ और निराश्रित बच्चों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता मिलने से उनका भविष्य सुरक्षित होता है और वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

यह योजना न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि समाज में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इससे उन बच्चों को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, जो कठिन परिस्थितियों के कारण पीछे रह जाते हैं।


🔹 प्रशासन की अपील

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने सभी संबंधित विभागों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे पात्र बच्चों की पहचान में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि यदि किसी को ऐसे बच्चों की जानकारी है, तो वह संबंधित अधिकारियों को सूचित करे, ताकि उन्हें समय पर सहायता मिल सके।


🔹 बैठक में मौजूद अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह, उपनिदेशक उच्च शिक्षा यशवीर कुमार, उपनिदेशक शिक्षा (माध्यमिक) भुवनेश्वरी वरवाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास अजय बदरेल, जिला कल्याण अधिकारी समीर और जिला बाल संरक्षण अधिकारी एन. आर. ठाकुर सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।


कुल मिलाकर, मंडी जिले में शुरू की गई यह पहल अनाथ और निराश्रित बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल उनकी शिक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और उज्जवल भविष्य भी मिल सकेगा।