मंडी में 152 करोड़ के ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास

rakesh nandan

16/03/2026

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में न्यायिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में 152 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मंडी ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास किया। यह अत्याधुनिक न्यायिक परिसर लगभग 9.6 हेक्टेयर भूमि पर निर्मित किया जाएगा। इसमें चार अलग-अलग ब्लॉक बनाए जाएंगे, जिनमें न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और आम लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। इस परियोजना के पूरा होने से मंडी और आसपास के क्षेत्रों में न्यायिक सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।


न्यायिक परिसर को अस्पतालों की तरह काम करना चाहिए

कार्यक्रम के बाद आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक परिसरों को अस्पतालों की तरह कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग अस्पतालों में उम्मीद लेकर जाते हैं, उसी प्रकार लोग न्यायालयों में भी राहत और न्याय की आशा लेकर आते हैं। इसलिए न्यायिक व्यवस्था को भी सेवा भावना के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक ढांचे में सुविधाएं बढ़ने के साथ-साथ उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।


मंडी को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मंडी को “छोटी काशी” के नाम से जाना जाता है और यहां लोग श्रद्धा भाव के साथ आते हैं। ऐसे स्थान पर न्याय के इस नए मंदिर की स्थापना होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक परिसर जल्द ही बनकर तैयार होगा और इससे क्षेत्र के लोगों को न्यायिक सुविधाओं का बेहतर लाभ मिलेगा।


मौलिक अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी अहम भूमिका

मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि आज सभी लोग मौलिक अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन मौलिक कर्तव्य भी संविधान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होना चाहिए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने अपनी प्राकृतिक विरासत को बहुत अच्छी तरह से संरक्षित रखा है।


न्याय हर नागरिक तक पहुंचाना सरकार का संकल्प

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मुख्य न्यायाधीश का हिमाचल प्रदेश आने पर स्वागत किया और उन्हें भविष्य में फिर से प्रदेश आने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प है कि हर नागरिक तक न्याय और उसके अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान की भावना के अनुरूप समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने लगभग 6000 अनाथ बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” के रूप में अपनाया है और इसके लिए देश का पहला कानून बनाया गया है।


महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत किया

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की शादी की आयु बढ़ाकर 21 वर्ष करने का निर्णय लिया गया है ताकि उन्हें लड़कों के समान अवसर मिल सकें। इसके साथ ही सरकार ने 150 बीघा तक की पैतृक संपत्ति में बेटियों को भी बराबर का अधिकार दिया है। उन्होंने बताया कि विधवा महिलाओं के बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना शुरू की गई है, जिसके तहत राज्य सरकार उनके बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठा रही है।


लंबित मामलों के निपटारे के लिए पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व लोक अदालतों के आयोजन के माध्यम से सरकार ने लगभग साढ़े पांच लाख लंबित मामलों का निपटारा किया है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि राष्ट्र के मूल आदर्शों और मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने संविधान के शिल्पकार भीमराव रामजी आंबेडकर के योगदान को भी याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संविधान का निर्माण हुआ, जिसने भारत के लोकतंत्र को समानता, न्याय और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित बनाया।


न्यायिक जागरूकता भी जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया ने कहा कि इस तरह के जागरूकता शिविरों का उद्देश्य हर व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि न्याय केवल अदालत तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि लोगों को उनके अधिकारों और कानूनी सहायता के बारे में जागरूक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के कई न्यायाधीशों सहित प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र की अनेक प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों, मंडी जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। नए ज्यूडिशियल कोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण से मंडी जिले में न्यायिक ढांचे को मजबूती मिलेगी और लोगों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त न्यायिक परिसर उपलब्ध होगा।