मंडी में जल जीवन मिशन की समीक्षा, गुणवत्ता पर जोर

rakesh nandan

27/03/2026

जिला मंडी में पेयजल आपूर्ति और जल गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की। उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय के वीसी रूम में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के अंतर्गत जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में जल शक्ति विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति, जल स्रोतों के रखरखाव, जल गुणवत्ता की स्थिति तथा वित्तीय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जाती है, ताकि योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना है।

उन्होंने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां गर्मियों या सूखे की स्थिति में जल स्रोत प्रभावित होते हैं। उन्होंने गोहर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि सूखे के समय जल गुणवत्ता की निगरानी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

उपायुक्त ने यह भी निर्देश दिए कि जल गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अप्रैल माह में एक दिवसीय सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जल परीक्षण, स्वच्छता मानकों और सुरक्षित पेयजल आपूर्ति से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इसके साथ ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए कि सभी विद्यालयों में स्थापित पानी के टैंकों की नियमित जांच और सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग को भी जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी प्रकार की जलजनित बीमारी को रोका जा सके।

बैठक के दौरान सदस्य सचिव एवं अधिशाषी अभियंता जल शक्ति मंडल मंडी देवराज चौहान ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत जिले में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जल आपूर्ति प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, स्रोत पुनर्जीवन और कैचमेंट क्षेत्र संरक्षण जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्मी के मौसम में भी पेयजल की उपलब्धता प्रभावित न हो।

बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त गुरसीमर सिंह, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरिंदम रॉय, शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं जिले के विभिन्न मंडलों के अधिशाषी अभियंता वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे न केवल लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल रहा है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आ रही है।

कुल मिलाकर, मंडी में आयोजित यह समीक्षा बैठक जल प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में बेहतर जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।