मंडी में 88.92 लाख की सिंचाई योजना किसानों को समर्पित

rakesh nandan

28/03/2026

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ठंडी बावड़ी से भडयाल प्रवाह सिंचाई योजना को किसानों को समर्पित कर दिया गया। यह कार्यक्रम शनिवार को हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण-दो के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसमें एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी के विकास सहायता कार्यालय के सहयोग से पूरा किया गया है। यह योजना न केवल क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है, बल्कि कृषि उत्पादन को बढ़ाने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी गई कि इस सिंचाई योजना के माध्यम से 50.76 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की गई है। इससे 209 किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। पहले जहां किसानों को सिंचाई के लिए प्राकृतिक स्रोतों या बारिश पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब उन्हें नियमित रूप से पानी उपलब्ध हो सकेगा।

परियोजना की लागत और निर्माण कार्य की बात करें तो इस योजना को लगभग 98.41 लाख रुपये की लागत से स्वीकृति प्रदान की गई थी, जबकि इसके निर्माण पर करीब 88.92 लाख रुपये खर्च किए गए। यह दर्शाता है कि योजना को निर्धारित बजट के भीतर सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।

इस सिंचाई परियोजना के तहत 1812 मीटर लंबा मुख्य चैनल और 1309 मीटर वितरण चैनल बनाया गया है। इन चैनलों के माध्यम से खेतों तक पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा मिल सकेगी और उनकी फसलें बेहतर तरीके से विकसित हो सकेंगी।

मुख्य अतिथि संजीव गुलेरिया ने अपने संबोधन में कहा कि यह योजना क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं और पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर भी कदम बढ़ाएं। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि ने सिंचाई क्षेत्र का निरीक्षण भी किया और खेतों में उगाई जा रही फसलों का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और विशेष रूप से सब्जी उत्पादन में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। बल्ह क्षेत्र को पहले से ही सब्जी उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है और इस योजना से इसे और मजबूती मिलेगी।

जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. हेमराज वर्मा ने किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और दवाइयों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचा सकता है और मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है। इसलिए किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।

उन्होंने फसल विविधीकरण के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि किसान विकास संघ को मजबूत करना आवश्यक है। इसके लिए नियमित बैठकें आयोजित कर सामूहिक फंड बनाया जाना चाहिए, जिससे प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से सिंचाई संरचना को हुए नुकसान की समय पर मरम्मत की जा सके।

इस अवसर पर खंड परियोजना प्रबंधक डॉ. राजेश कुमार, कृषि विकास अधिकारी डॉ. हंसराज वालिया सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

यह सिंचाई योजना न केवल किसानों के लिए वरदान साबित होगी, बल्कि क्षेत्र में कृषि को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।