जिला मंडी में वन संरक्षण अधिनियम (FCA) के अंतर्गत लंबित प्रस्तावों की समीक्षा को लेकर उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न विभागों की विकास परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की गई और उनके शीघ्र निष्पादन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने स्पष्ट रूप से कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी को रोकने के लिए FCA प्रस्तावों का समयबद्ध निपटारा बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि विकास परियोजनाओं को गति मिल सके।
उन्होंने जानकारी दी कि 17 मार्च, 2023 से अब तक जिला मंडी में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 30 प्रस्तावों को अंतिम स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। यह प्रशासन की सक्रियता और समन्वय का परिणाम है। इनमें हाल ही में फरवरी माह में एक और मार्च माह में दो प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।
इन स्वीकृत प्रस्तावों में महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं, जैसे सलापड़-तत्तापानी सड़क, प्रस्तावित करसोग न्यायालय परिसर और पधर न्यायालय परिसर। इन परियोजनाओं के पूरा होने से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
उपायुक्त ने बैठक में सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रत्येक लंबित प्रस्ताव के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समयबद्ध तरीके से कार्य नहीं किया गया तो विकास कार्यों में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न होंगी। इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और निर्धारित अवधि में सभी औपचारिकताएं पूरी करें।
उन्होंने वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित प्रक्रियाओं को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया। FCA के तहत स्वीकृति प्राप्त करने के लिए कई तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, जिन्हें समय पर पूरा करना आवश्यक है।
बैठक के दौरान कुल 131 FCA प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें न्यायपालिका से संबंधित 8 मामले, परिवेश 1.0 पोर्टल के 38 प्रस्ताव और परिवेश 2.0 पोर्टल के 68 प्रस्ताव शामिल हैं। ये सभी प्रस्ताव सड़कों, भवनों, न्यायालय परिसरों और जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित हैं, जो जिले के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इसके अतिरिक्त, उन प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई जो पिछले 5 से 10 वर्षों के दौरान स्टेज-1 के तहत सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त कर चुके हैं, लेकिन अभी तक स्टेज-2 (अंतिम) स्वीकृति के लिए लंबित हैं। ऐसे कुल 25 प्रस्तावों की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन लंबित प्रस्तावों को जल्द से जल्द अंतिम स्वीकृति के लिए आगे बढ़ाया जाए, ताकि वर्षों से अटकी परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा सके। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और आम जनता को सीधा लाभ होगा।
बैठक में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव विवेक कायस्थ, डीएफओ (मुख्यालय) बसु डोगरा, डीएफओ जोगिंद्रनगर अश्वनी कुमार सहित लोक निर्माण, जल शक्ति और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा डीएफओ सुकेत राकेश कटोच, डीएफओ करसोग के.बी. नेगी और डीएफओ एस.एस. कश्यप वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
यह बैठक जिला मंडी में विकास परियोजनाओं को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि FCA प्रस्तावों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाता है, तो जिले में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।